ममता ने 'केरलम' को मंजूरी पर दी बधाई, लेकिन 'बांग्ला' के प्रस्ताव में देरी को बताया 'बंगाली विरोधी' साजिश
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर पश्चिम बंगाल का नाम बदलने के प्रस्ताव को जानबूझकर लटकाने का आरोप लगाया है. उन्होंने इसे 'बंगाली विरोधी' भेदभाव बताते हुए केरल की त्वरित मंजूरी को भाजपा और माकपा के बीच 'राजनीतिक साठगांठ' का परिणाम करार दिया.
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. इस बार विवाद की जड़ राज्य का नाम बदलने के प्रस्ताव को लेकर है. मुख्यमंत्री ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए उन पर बंगाली विरोधी होने और राज्य के साथ भेदभाव करने का गंभीर आरोप लगाया. ममता बनर्जी का यह बयान उस समय आया है जब केंद्रीय कैबिनेट ने केरल का नाम बदलकर आधिकारिक तौर पर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है, जबकि बंगाल का प्रस्ताव वर्षों से ठंडे बस्ते में पड़ा है.
ममता बनर्जी ने नाम बदलने की इस मांग के पीछे एक व्यावहारिक और गंभीर तर्क दिया है. उन्होंने मौजूदा नाम 'वेस्ट बंगाल' के कारण होने वाली प्रशासनिक और शैक्षणिक समस्याओं पर जोर देते हुए कहा कि वर्णमाला के क्रम में 'W' सबसे अंत में आता है. इसकी वजह से केंद्र सरकार की बैठकों से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं तक में बंगाल के प्रतिनिधि और छात्र हमेशा हाशिए पर रहते हैं. मुख्यमंत्री ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा- 'जब हमारे छात्र इंटरव्यू के लिए जाते हैं, तो उन्हें अंत में बुलाया जाता है. मुझे भी बैठकों में सबसे आखिर में बोलने का मौका मिलता है क्योंकि मैं वेस्ट बंगाल की मुख्यमंत्री हूं.'
'केरलम' की मंजूरी और राजनीतिक साठगांठ का आरोप
केरल के लोगों को बधाई देते हुए ममता बनर्जी ने दक्षिणी राज्य को मिली त्वरित मंजूरी के पीछे की राजनीति पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि केरल को इतनी जल्दी हरी झंडी मिलना दरअसल भाजपा (BJP) और माकपा (CPI-M) के बीच राजनीतिक गठबंधन का इनाम है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह गठबंधन अब केवल 'बिना लिखा' नहीं रह गया है, बल्कि धरातल पर साफ दिखाई दे रहा है. उन्होंने सवाल किया कि अगर केरल का नाम बदल सकता है, तो बंगाल के साथ बदले की भावना से भेदभाव क्यों किया जा रहा है?
सांस्कृतिक पहचान और 'चुनावी फायदे' की राजनीति!
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ने राज्य की संस्कृति, सभ्यता और बौद्धिक पहचान को दर्शाने के लिए राज्य विधानसभा से दो बार सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया है. केंद्र की तकनीकी जरूरतों को पूरा करने के लिए 'बांग्ला' नाम के प्रस्ताव में हिंदी, अंग्रेजी और बंगाली का भाषाई संतुलन भी सुनिश्चित किया गया. ममता बनर्जी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार 'बांग्ला' शब्द का इस्तेमाल केवल चुनाव के दौरान वोट पाने के लिए करती है, जबकि राज्य के महापुरुषों और इसकी पहचान का सम्मान करने में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है. उन्होंने कड़े शब्दों में कहा- 'आज आप सत्ता में हैं इसलिए रोक रहे हैं, लेकिन एक दिन हम यह नाम जरूर बदलवा लेंगे.'
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