आर्थिक सर्वेक्षण में RTI कानून को लेकर ऐसा क्या है, जिसको लेकर विपक्ष ने मोदी सरकार पर बोला जोरदार हमला?

खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि सरकार देश के सबसे मजबूत पारदर्शिता कानून को धीरे-धीरे कमजोर कर रही है.

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Sagar Bhardwaj

इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में सूचना का अधिकार (RTI) कानून को लेकर “री-एग्जामिनेशन” यानी दोबारा समीक्षा की बात सामने आने के बाद सियासी माहौल गर्म हो गया है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार पर तीखा हमला बोला है.

खड़गे का आरोप: RTI को कमजोर करने की कोशिश

खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि सरकार देश के सबसे मजबूत पारदर्शिता कानून को धीरे-धीरे कमजोर कर रही है. उनका कहना है कि इकोनॉमिक सर्वे में दिए गए सुझावों से साफ संकेत मिलता है कि सरकार जनता की जवाबदेही कम करना चाहती है. खड़गे ने सवाल उठाया कि “मनरेगा को कमजोर करने के बाद अब क्या RTI की बारी है?”

लंबित मामलों और संशोधनों पर उठाए सवाल

कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि साल 2025 तक RTI से जुड़े 26 हजार से ज्यादा मामले लंबित हैं. उन्होंने 2019 के संशोधनों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे सूचना आयुक्तों की स्वतंत्रता प्रभावित हुई, क्योंकि उनके कार्यकाल और वेतन का नियंत्रण केंद्र सरकार के हाथ में चला गया.

डेटा प्रोटेक्शन कानून पर भी निशाना

खड़गे ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 को लेकर भी सरकार की आलोचना की. उनका कहना है कि इस कानून के जरिए “प्राइवेसी” को बहाना बनाकर RTI के तहत मांगी जाने वाली अहम जानकारियों को रोका जा सकता है.

RTI एक्टिविस्ट और CIC की कमी का मुद्दा

उन्होंने यह भी कहा कि 2014 के बाद 100 से ज्यादा RTI कार्यकर्ताओं की हत्या हुई, लेकिन व्हिसल ब्लोअर प्रोटेक्शन एक्ट को सही तरीके से लागू नहीं किया गया. साथ ही, लंबे समय तक मुख्य सूचना आयुक्त का पद खाली रहना भी सरकार की गंभीरता पर सवाल खड़े करता है.

इकोनॉमिक सर्वे की सफाई

वहीं इकोनॉमिक सर्वे का कहना है कि RTI कानून को कमजोर करने का इरादा नहीं है. सर्वे के मुताबिक, कुछ बदलावों पर सिर्फ चर्चा का सुझाव दिया गया है, ताकि पारदर्शिता और गोपनीयता के बीच संतुलन बना रहे.