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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव और ईवीएम पर उठे सवाल, विपक्षी INDIA अलायंस की राजनीतिक अवसरवादिता?

महाराष्ट्र चुनाव में ईवीएम को लेकर उठे विवाद ने राजनीति की वास्तविकता को उजागर किया है. जहां एक तरफ विपक्षी दल अपनी हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ रहे हैं, वहीं ग्रामीणों का कहना है कि इन आरोपों में सच्चाई नहीं है.

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Mayank Tiwari

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र चुनाव परिणामों के बाद शिवसेना-यूबीटी और कांग्रेस दोनों ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए. जहां शिवसेना-यूबीटी के नेता उद्धव ठाकरे ने तो चुनाव आयोग से 5% वीवीपैट पुनर्गणना की मांग करने का फैसला लिया. उन्होंने अपने सभी हारने वाले उम्मीदवारों को निर्देश दिया कि वे उन मतदान केंद्रों पर पुनर्गणना के लिए याचिका दायर करें, जहां ईवीएम से छेड़छाड़ का संदेह है. कांग्रेस ने भी ईवीएम को लेकर आशंका व्यक्त की और चुनाव आयोग के कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने फैसला किया है कि जिन मतदान केंद्र पर ईवीएम छेड़छाड़ का शक है, वहां पर 5 फीसदी VVPAT के रीकाउंटिंग की याचिका दायर की जाएगी. उद्धव ठाकरे ने अपने सभी पराजित उम्मीदवारों को आदेश दिया है कि जिन पोलिंग बूथ पर ईवीएम छेड़छाड़ का शक है, वहां पर 5 फीसदी VVPAT की दोबारा गिनती करने की याचिका जल्द दायर करें.

सोलापुर में अजीब घटना: अवैध "पुनः चुनाव" का प्रयास

महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के मरकडवाडी गांव में एक अजीब घटना हुई, जहां स्थानीय लोगों ने अवैध रूप से "पुनः चुनाव" कराने की योजना बनाई.  इन लोगों का आरोप था कि ईवीएम में गड़बड़ी के कारण चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. हालांकि, प्रशासन ने इस मांग को खारिज कर दिया और इसे अलोकतांत्रिक करार दिया. इस घटना से यह साफ हुआ कि ईवीएम के प्रति असंतोष राजनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसे लेकर जनमानस में कई सवाल भी हैं.

कांग्रेस का दांव पड़ा उल्टा, ग्रामीणों का जवाब

कांग्रेस द्वारा उठाए गए ईवीएम के सवालों को मरकडवाडी के ग्रामीणों ने पाखंड करार दिया. ग्रामीणों का कहना था कि जब महा विकास अघाड़ी (एमवीए) ने लोकसभा चुनाव में ईवीएम के जरिए जीत हासिल की थी, तब किसी ने कोई सवाल नहीं उठाया. उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के राम सातपुते ने विकास कार्यों के कारण गांव में बहुत लोकप्रियता प्राप्त की और उनकी हार को लेकर किसी ने ईवीएम पर सवाल नहीं उठाए.

महाराष्ट्र सरकार की लाड़ली बहन योजना चुनाव में रही कारगर

वहीं, महिलाओं को मजबूत बनाने के मकसद से बनाई गई लड़की बहिन योजना ने भी मतदाता भावना को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. जैसा कि ग्रामीणों कहा है, "भले ही हम मतपत्र पर वापस लौटते हैं, गलतियां संभव हैं. मगर, लड़की बहिन योजना के प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.