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BMW की चाहत से विवादों में लोकपाल, विरोध के बाद 5 करोड़ रुपए का कार टेंडर रद्द किया

भ्रष्टाचार विरोधी संस्था लोकपाल ने सात लग्जरी BMW कार खरीदने का अपना टेंडर रद्द कर दिया है, जिनकी कुल कीमत लगभग 5 करोड़ रुपए थी.

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Ashutosh Rai

नई दिल्ली: भ्रष्टाचार विरोधी संस्था लोकपाल ने सात लग्जरी BMW कार खरीदने का अपना टेंडर रद्द कर दिया है, जिनकी कुल कीमत लगभग 5 करोड़ रुपए थी. इसका टेंडर होते ही लोगों ने बड़े पैमाने पर आलोचना की थी. जिस संस्था का काम भ्रष्टाचार को उजागर करना है, वे ही महंगी गाड़ियों को खरीद रहे हैं. लोगों में इसकी बहुत निंदा की थी.

आलोचना के बाद आया फैसला

यह फैसला विपक्षी पार्टियों और सिविल सोसाइटी ग्रुप्स की तरफ से बड़े पैमाने पर हुई आलोचना के बाद आया है, जिन्होंने पारदर्शिता को बढ़ावा देने वाली संस्था द्वारा महंगी गाड़ियों की खरीद की निंदा की थी. अक्टूबर में भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसी ने सात हाई-एंड BMW 3 सीरीज 330Li गाड़ियां खरीदने के लिए एक टेंडर जारी किया था, जिसकी प्राइस लगभग 5 करोड़ रुपए थी. लोकपाल में अभी चेयरमैन सहित सात सदस्य हैं जो इसकी स्वीकृत संख्या आठ से एक कम है.

टेंडर डॉक्यूमेंट में यह लिखा था

टेंडर डॉक्यूमेंट में लिखा था, "भारत का लोकपाल भारत के लोकपाल को सात BMW 3 सीरीज 330Li कारों की सप्लाई के लिए प्रतिष्ठित एजेंसियों से ओपन टेंडर आमंत्रित करता है." टेंडर गाइडलाइंस के तहत, ड्राइवरों और अन्य नामित स्टाफ सदस्यों के लिए ट्रेनिंग देना अनिवार्य था. डॉक्यूमेंट में आगे कहा गया है, "ट्रेनिंग कम से कम सात (07) दिनों की अवधि के लिए आयोजित की जाएगी, जिसे गाड़ियों की डिलीवरी की तारीख से 15 दिनों के भीतर पूरा किया जाना है. सटीक शेड्यूल भारत के लोकपाल के साथ सलाह करके तय किया जाएगा."

लोकपाल क्या है?

लोकपाल भारत में एक भ्रष्टाचार विरोधी संस्था है. यह संस्था प्रधानमंत्री, मंत्रियों और सरकारी कर्मचारियों सहित सार्वजनिक अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग की शिकायतों की जांच करने के लिए स्थापित किया गया है. यह शासन में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र रूप से काम करता है.

1963 में प्रस्तावित किया गया था लोकपाल का विचार

लोकपाल का विचार पहली बार 1963 में प्रस्तावित किया गया था, लेकिन इसे कानून बनने में दशकों लग गए. लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम आखिरकार 2013 में भारतीय संसद द्वारा पारित किया गया और 2014 में लागू हुआ. केंद्रीय स्तर पर लोकपाल, लोकायुक्तों का पूरक है, जो अलग-अलग राज्यों में इसी तरह की संस्थाएं हैं. इनका लक्ष्य भ्रष्टाचार को पूरी तरह से रोकना है.