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Lok Sabha Election 2024: Modi ka Parivar पर रार, महाराष्ट्र की सियासत में इन परिवारों का खूब बढ़ा कुनबा, देखें फैमिली ट्री

Modi ka Parivar: राजनीति में वंशवाद और परिवारवाद वर्षों से चला आ रहा है. मौजूदा समय में कोई भी राजनीतिक दल वंशवाद और परिवारवाद से अछूता नहीं हैं. आज महाराष्ट्र के राजनीतिक घरानों के बारे नें बता रहे हैं, जहां जमकर वंशवाद और परिवारवाद है.

Pankaj soni
Edited By: Pankaj Soni
Lok Sabha Election 2024: Modi ka Parivar पर रार, महाराष्ट्र की सियासत में इन परिवारों का खूब बढ़ा कुनबा, देखें फैमिली ट्री

Modi ka Parivar : राजनीति में वंशवाद और परिवारवाद वर्षों से चला आ रहा है. मौजूदा समय में कोई भी राजनीतिक दल वंशवाद और परिवारवाद से अछूती नहीं हैं. बीजेपी ने विपक्ष पर हमेशा वंशवाद और परिवारवाद को लेकर हमले करती है. लेकिन बीजेपी में भी वंशवाद और परिवारवाद की राजनीति देखने के लिए मिलती है.आज हम आपको महाराष्ट्र के राजनीतिक घरानों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका परिवार राजनीति में अहम धुरी बन गया है. 

नारायण राणे परिवार 

महाराष्ट्र की राजनीति में नारायण परिवार का खासा दखल है. नारायण राणे ने शिवसेना से राजनीतिक फर शुरू किया था. बाद में कांग्रेस से होते हुए बीजेपी में पहुंच चुके हैं. राणे ने 1968 में शिवसेना ज्वाइन किया और 1990 में पहली बार विधायक बने. शिवसेना-बीजेपी सरकार में मुख्यमंत्री भी बने. साल 2005 में उन्होंने शिवसेना छोड़कर कांग्रेस ज्वाइन कर लिया. इसे बाद 2017 में कांग्रेस छोड़कर अलग पार्टी बनाई और फिर बीजेपी के समर्थन से राज्यसभा में पहुंचे. नाराणय राणे की राजनीतिक विरासत उनके बेटे नीलेश राणे आगे बढ़ा रहे हैं. राणे का राजनीतिक असर सिंधदुर्ग और कोंकण इलाके में है.

निलंगेकर परिवार 

महाराष्ट्र की राजनीति में लातूर इलाके में शिवाजी निलंगेकर परिवार का अच्छा दबदबा है. महाराष्ट्र की सियासत में शिवाजी निलंगेकर 1985-86 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे. जिले की निलंगा विधानसभा सीट पर 1999 से अब तक निलंगेकर परिवार के सदस्य चुने जाते रहे हैं. निलंगेकर की राजनीतिक विरासत उनके बेटे दिलीप निलंगेकर के हाथों में है, जो फिलहाल विधायक हैं. बहू रूपा सांसद रह चुकी हैं और पोते संभाजी निलंगेकर फडणवीस सरकार में मंत्री रह चुके हैं.


विखे पाटिल परिवार 

अब बीजेपी में महाराष्ट्र की सिसायत में बालासाहेब विखे पाटिल कद्दावर नेता माने जाते हैं. अहमदनगर उत्तर से सात बार विधायक रह चुके है. साथ ही केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे हैं. उनके बेटे राधाकृष्ण महाराष्ट्र में नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं. उन्होंने हाल ही में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी ज्वाइन की और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री रहे. बालासाहेब की बहू शालिनी राधाकृष्ण अहमदनगर की जिला परिषद अध्यक्ष हैं और उनके पोते सुजय पाटिल अहमदनगर सीट से बीजेपी के सांसद हैं. अहमदनगर और विखे पाटिल परिवार एक दूसरे के पर्याय हो चुके हैं.

देशमुख परिवार 

महाराष्ट्र की राजनीति में विलासराव देशमुख शक्तिशाली नेता के रूप में जाने जाते हैं. महाराष्‍ट्र के लातूर में जन्‍मे देशमुख ने पंचायत से अपने राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत की और राष्‍ट्रीय राजनीति तक अपनी पहुंच बनाई. वे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री भी बने. देशमुख के निधन के बाद उनकी राजनीतिक विरासत को उनके बेटे अमित देशमुख और धीरज देशमुख संभाल रहे हैं. जबकि रितेश फिल्म में एक्टर हैं.

वसंतदादा पाटिल 

महाराष्ट्र की राजनीति में वसंतदादा पाटिल की एक दौर में था. वसंतदादा 1977 और 1983 में दो बार मुख्यमंत्री रहे हैं और मौजूदा समय में पाटिल परिवार की तीसरी पीढ़ी महाराष्ट्र की राजनीति में सक्रिय है. इस परिवार का प्रभाव सांगली और इसके आसपास के इलाके में है. पाटिल की पत्नी शालिनी ताई भी कैबिनेट मंत्री रह चुकी हैं. इसके अलावा उनके बेटे प्रकाश और पोते प्रतीक सांगली से सांसद रह चुके हैं.

शिंदे परिवार

महाराष्ट्र में एक सब इंस्पेक्टर से देश के गृहमंत्री तक का सफर करने वाले कांग्रेस नेता सुशील कुमार शिंदे प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. शिंदे परिवार की राजनीतिक विरासत बेटी के हाथ में है. वह महाराष्ट्र में कांग्रेस का दलित चेहरा माने जाते हैं और सोलपुर इलाके में अच्छा खासा प्रभाव रखते हैं. सुशील कुमार शिंदे की राजनीतिक विरासत उनकी बेटी प्रणीति शिंदे संभाल रही हैं. वह सोलापुर विधानसभा सीट से विधायक हैं.