दिल्ली की अदालत से RJD प्रमुख लालू यादव और उनके परिवार को आज यानी शुक्रवार को फिर से झटका लगा है. अदालत ने जमीन के बदले रेलवे में नौकरी देने के मामले में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के आरोप तय किए हैं.
स्पेशल जज विशाल गोगने ने आदेश देते हुए कहा कि उचित संदेह के आधार पर इस पूरे मामले में लालू यादव और उनके परिवार द्वारा एक बड़ी साजिश का पता चला है. अदालत की ओर से यह साफ कहा गया कि उन्होंने और उनके परिवार ने एक क्रिमिनल सिंडिकेट की तरह काम किया है.
दिल्ली की कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले पर फैसला सुनाते हुए कहा कि लालू और उनके पूरे परिवार ने इसमें एक क्रिमिनल गैंग की तरह काम किया है. उन्होंने कहा कि उनके परिवार को बरी करने की याचिका मानने लायक बिल्कुल भी नहीं है. मामले की जांच कर रही CBI द्वारा दायर चार्जशीट पर ध्यान देते हुए कोर्ट ने कहा कि लालू यादव के सहयोगियों को इस घोटाले में सह-साज़िशकर्ता के रूप में पहचाना गया है. अदालत ने कहा कि उन्होंने अपनी आधिकारिक पदों का इस्तेमाल सरकारी नौकरियों के लिए किया और इसके बदले जमीन मांगे. कोर्ट ने कहा कि 98 जीवित आरोपियों में से 46 के खिलाफ आरोप तय किए जाएंगे. जिसमें खुद लालू यादव और उनका पूरा परिवार शामिल है. इसी के साथ 52 आरोपियों को बरी करने के भी आदेश दिए गए हैं, क्योंकि उनके खिलाफ चार्जशीट के मुताबिक कोई ठोस सबूत नहीं मिले.
अदालत का यह फैसला CBI द्वारा लगाए गए आरोपों पर लिया गया है. जिसमें 2004 और 2009 के बीच लालू यादव के रेल मंत्री के कार्यकाल के दौरान ग्रुप D की नौकरियां उम्मीदवारों को जमीन के बदले देने का आरोप है. उन परिवारों ने लालू परिवार को बेहद कम कीमतों पर जमीन ट्रांसफर किए थे. जांच एजेंसी के अनुसार, कई नौकरी के इच्छुक लोगों या उनके रिश्तेदारों ने पटना और अन्य जगहों पर जमीन यादव परिवार के सदस्यों और उनसे जुडी फर्मों को बेची या तोहफे में दी थी. CBI का आरोप है कि भर्ती के लिए उचित प्रक्रिया का इस्तेमाल नहीं किया गया है.