नई दिल्ली: इंसानियत और निस्वार्थ प्रेम की एक ऐसी मिसाल केरल से सामने आई है जिसने पूरे देश की आंखों में आंसू और दिल में सम्मान भर दिया है. मात्र 10 महीने की नन्ही एलिन शेरिन अब्राहम भले ही अब हमारे बीच नहीं है, लेकिन अपनी विदाई के साथ वह पांच लोगों को जिंदगी का सबसे अनमोल तोहफा दे गई है. सड़क हादसे में ब्रेन-डेड घोषित होने के बाद उसके माता-पिता ने जो फैसला लिया, उसने एलिन को केरल के इतिहास में एक अमर स्थान दिला दिया है.
पतनमतिट्टा के मल्लापल्ली में सेंट थॉमस सीएसआई चर्च कब्रिस्तान में जब नन्ही एलिन को दफन किया गया, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं. मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के विशेष आदेश पर मासूम बच्ची को पूरे राजकीय सम्मान और पुलिस 'गार्ड ऑफ ऑनर' के साथ विदाई दी गई. राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज और केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने भी वहां पहुंचकर नन्ही परी को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की. इस दुखद घड़ी में हजारों लोग उसे अंतिम विदाई देने चर्च पहुंचे थे.
दुर्घटना के बाद कोच्चि के अमृता अस्पताल में डॉक्टरों ने एलिन को ब्रेन-डेड घोषित कर दिया था. अरुण अब्राहम और शेरिन जॉन के लिए यह पहाड़ टूटने जैसा था, लेकिन उन्होंने अपने व्यक्तिगत दुख को दरकिनार कर मानवता की सेवा को चुना. उन्होंने बेटी की किडनी, लिवर, आंखें और हार्ट वाल्व दान करने का साहसी निर्णय लिया. मुख्यमंत्री ने इस कदम की सराहना करते हुए इसे 'दया का महान कार्य' बताया, जो केरल की सामाजिक और मानवीय संस्कृति की सच्ची भावना को दर्शाता है.
अंगों को समय पर जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए कोच्चि से तिरुवनंतपुरम के बीच 'ग्रीन कॉरिडोर' बनाया गया. एम्बुलेंस ने तीन घंटे से कुछ अधिक समय में यह दूरी तय की. एलिन का लिवर छह महीने की ध्रिया को मिला, जो राज्य में लिवर पाने वाली सबसे कम उम्र की बच्ची बनी. इसके अलावा 10 साल की एक अन्य बच्ची को किडनी दी गई, जिसने सफल सर्जरी के बाद होश में आकर अपने माता-पिता से बात की. बच्ची के हार्ट वाल्व और कॉर्निया भी सुरक्षित रखे गए हैं.
एलिन के माता-पिता के इस नेक कार्य की चर्चा पूरे देश में हो रही है. राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर और अभिनेता कमल हासन ने भी सोशल मीडिया पर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं. कमल हासन ने अपने भावुक संदेश में लिखा कि एलिन अब पांच और लोगों के माध्यम से इस दुनिया को देखेगी और बेहतर जिंदगी जिएगी. उन्होंने माता-पिता के धैर्य को सलाम करते हुए कहा कि वे हमेशा दुनिया के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण बने रहेंगे. इन संदेशों ने शोक संतप्त परिवार को हिम्मत दी.
सड़क हादसा 5 फरवरी को हुआ था और 13 फरवरी को एलिन ने अंतिम सांस ली. उसकी 10 महीने की छोटी सी जिंदगी ने जाते-जाते समाज को अंगदान के प्रति जागरूक करने का एक बहुत बड़ा संदेश दिया है. डॉक्टरों, पुलिस और मेडिकल सहायता टीमों के बेहतरीन तालमेल ने इस पूरी प्रक्रिया को संभव बनाया. एलिन शारीरिक रूप से विदा हो चुकी है, लेकिन पांच अलग-अलग शरीरों में उसकी धड़कनें, उसकी सांसें और उसकी दृष्टि हमेशा के लिए इस दुनिया में जीवित रहेंगी.