'उनके घर जला दो…’, कश्मीर लौट रहे पंडितों को खुली धमकी; 6 कर्मचारियों की जानकारी उजागर करने का दावा
कश्मीर लौटने की कोशिश कर रहे कश्मीरी पंडितों को कथित आतंकी प्रचार मंच से धमकी मिलने का मामला सामने आया है. सुरक्षा एजेंसियों ने निगरानी बढ़ाई है और प्रभावित कर्मचारियों की सुरक्षा मजबूत की जा रही है.
कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास की कोशिशों के बीच नई धमकी ने सुरक्षा चिंता बढ़ा दी है. रिपोर्ट के अनुसार, एक कथित आतंकी प्रचार मंच ने पंडित कर्मचारियों और उनकी मदद करने वालों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है. एजेंसियां मामले पर नजर रख रही हैं.
छह कर्मचारियों की जानकारी साझा करने का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक, छह कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों से जुड़ी कथित निजी जानकारी एक ऑनलाइन मंच पर साझा करने का दावा किया गया है. इनमें प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज के तहत नियुक्त कर्मचारियों को विशेष रूप से निशाना बनाने की बात कही गई है. सुरक्षा कारणों से इन कर्मचारियों के नाम और संपर्क संबंधी विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं.
खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इस तरह की जानकारी सामने लाने का मकसद संबंधित लोगों में डर पैदा करना और उन्हें संभावित निशाने के रूप में चिन्हित करना हो सकता है. एजेंसियां ऑनलाइन गतिविधियों की निगरानी कर रही हैं और धमकी की विश्वसनीयता तथा इसके पीछे सक्रिय लोगों की जांच की जा रही है.
Also Read
वापसी की कोशिशों को लेकर हिंसा की धमकी
बताया गया है कि कथित संदेश में घाटी लौटने वाले कश्मीरी पंडितों और उनके पुनर्वास में मदद करने वाले लोगों के खिलाफ हिंसा भड़काने की कोशिश की गई है. इसमें एक सामाजिक कार्यकर्ता का नाम भी लिया गया है और समुदाय की वापसी को लेकर नाराजगी जताई गई है.
संदेश में पंडितों के घरों और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने तथा उन्हें मदद देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की धमकी का जिक्र है. ऐसी सामग्री का मकसद केवल संबंधित लोगों को डराना नहीं, बल्कि घाटी में दोबारा बसने की कोशिश कर रहे परिवारों के बीच असुरक्षा का माहौल बनाना भी हो सकता है. सुरक्षा एजेंसियां इस पहलू को गंभीरता से देख रही हैं.
सुरक्षा एजेंसियों ने निगरानी बढ़ाई
धमकी के बाद प्रवासी कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. उनके आवासीय क्षेत्रों के आसपास निगरानी बढ़ाने के साथ सुरक्षित आवाजाही के इंतजाम किए जा रहे हैं. एजेंसियां उन नेटवर्क की पहचान की कोशिश कर रही हैं, जो कथित तौर पर आतंकी संगठनों के नाम पर ऑनलाइन प्रचार और डर फैलाने का काम करते हैं.
सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि ऐसे मंचों के जरिए सीधे हमले के अलावा मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश भी की जाती है. इसी वजह से इंटरनेट पर प्रसारित होने वाली धमकियों और निजी जानकारी के दुरुपयोग को लेकर निगरानी बढ़ाई गई है.
हजारों परिवारों की वापसी अब भी चुनौती
संसदीय समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, कश्मीर में रहने वाले प्रवासी परिवारों में 6,510 ने अपने पुराने घरों में लौटने की इच्छा जताई थी. हालांकि, इनमें से केवल तीन परिवार ही अब तक घाटी में दोबारा व्यवस्थित रूप से बस पाए हैं. यह आंकड़ा बताता है कि वापसी की राह में सुरक्षा के साथ-साथ आवास, रोजगार, शिक्षा और सामाजिक परिस्थितियां भी बड़ी चुनौतियां हैं.
समिति ने सरकार से इन सभी पहलुओं का विस्तृत आकलन करने को कहा है. ऐसे में ताजा धमकी ने पुनर्वास की प्रक्रिया से जुड़ी चिंताओं को और बढ़ा दिया है. अब सुरक्षा व्यवस्था और भरोसे का माहौल बनाना सरकार के सामने अहम चुनौती है.