'सामान्य वर्ग के खिलाफ रची जा रही साजिश', जेपी नड्डा की आरक्षण सुधार कार्यकर्ताओं से मुलाकात पर बोले अजीत भारती

जेपी नड्डा ने आरक्षण सुधार कार्यकर्ताओं से मुलाकात की, लेकिन अजीत भारती ने इसे बातचीत का दिखावा बताया. उन्होंने आंदोलन की असली मांगों को दरकिनार करने का आरोप लगाया.

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Sagar Bhardwaj

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 अगस्त को हुए बड़े प्रदर्शन के कुछ दिन बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे कार्यकर्ताओं के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की. इसमें नीट अभ्यर्थी हर्ष दुबे, रण बहादुर सिंह चौहान और मृत्युंजय पाठक समेत अन्य लोग शामिल रहे. नड्डा ने इसे पहले से तय कार्यक्रम के तहत हुई सौहार्दपूर्ण बातचीत बताया और कहा कि प्रतिनिधिमंडल से जल्द दोबारा मुलाकात होगी.

भारती ने बताया सामान्य वर्ग के खिलाफ साजिश

मुलाकात के बाद आरक्षण सुधार आंदोलन से जुड़े पत्रकार और यूट्यूबर अजीत भारती ने नड्डा पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी हर्ष दुबे को आंदोलन का स्थापित नेता बताकर बातचीत का दिखावा कर रही है, जबकि उनकी ओर से सौंपे गए पत्र में आरक्षण शब्द तक नहीं था. भारती ने इसे आंदोलन की मूल मांगों को कमजोर करने की कोशिश बताया और नड्डा से ऐसे खेल बंद करने को कहा.


किसे बनाया चेहरा?

भारती ने यह भी सवाल उठाया कि आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल स्वामी आनंद स्वरूप को बातचीत में क्यों नहीं बुलाया गया. उन्होंने लखनऊ में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से दुबे की मुलाकात का जिक्र करते हुए दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने पहले ही दुबे को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था. दूसरी ओर दुबे ने नड्डा से बातचीत को सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि आंदोलन किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि समान अवसर और न्यायपूर्ण व्यवस्था के लिए है.

 21 अगस्त का प्रदर्शन

यह आंदोलन कई सप्ताह की ऑनलाइन लामबंदी के बाद जंतर-मंतर तक पहुंचा था. प्रदर्शनकारियों ने जाति आधारित आरक्षण की समीक्षा, आर्थिक आधार को महत्व देने और यूजीसी के अब स्थगित इक्विटी नियमों को वापस लेने जैसी मांगें उठाईं. प्रदर्शन में जनरल सेना, चाणक्य सेना और श्री राजपूत करणी सेना समेत कई समूह शामिल हुए. भारी पुलिस तैनाती के बीच बैरिकेडिंग भी तोड़ी गई थी.

सवाल अभी कायम

कॉकरोच जनता पार्टी के संयोजक अभिजीत दिपके ने पूछा कि नड्डा ने 21 अगस्त के आंदोलन का नाम क्यों नहीं लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे पर क्या सोचते हैं. नड्डा की अगली बैठक अब अहम मानी जा रही है. हालांकि केंद्र ने अभी संवैधानिक आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा पर कोई फैसला घोषित नहीं किया है.