अपमान, तिरस्कार, धोखा... हेमंत के 'चाचा' चंपई के 'बगावत' की पूरी कहानी, क्या 'सरकाएंगे' JMM की 'जमीन'?
Jharkhand Politics: झारखंड की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से बना सस्पेंस कायम है. पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन का कोलकाता से फ्लाइट पकड़कर दिल्ली आने और भाजपा ज्वाइन करने की खबर ने झारखंड की राजनीति में 'हलचल' पैदा कर दी. हालांकि, जब चंपई दिल्ली पहुंचे तो उन्होंने 'निजी कारणों' का हवाला दिया और कहा कि मैं अपने बच्चों से मिलने आया हूं. फिर उनके सोशल मीडिया पोस्ट ने झारखंड की सियासत में जारी सस्पेंस को बरकरार रखा है.
Jharkhand Politics: झारखंड की राजनीति में बने 'सस्पेंस' का आज दूसरा दिन है. रविवार को झारखंड की सियासत से जुड़े घटनाक्रम में राजधानी रांची से लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक जो कुछ हुआ, उसे लेकर लग रहा था कि चंपई सोरेन काफी पीड़ा में हैं. उनका मन बिलकुल भी झारखंड मुक्ति मोर्चा में नहीं लग रहा है, वे रविवार को ही पार्टी से रिश्तों को तोड़कर भाजपा का दामन थाम लेंगे, लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं. झारखंड की सियासत में चंपई ने जो 'हलचल' पैदा की, उसे उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए 'सुनामी' बना दिया, जिसमें उन्होंने अपने दुख, दर्द, पीड़ा, अपमान, तिरस्कार की पूरी कहानी बयां कर दी. अब सवाल ये कि क्या चंपई सोरेन जो कुछ कर रहे हैं, वो हेमंत से 'बदला' है? खैर, इस सवाल का जवाब तो भविष्य में ही मिल पाएगा, लेकिन आइए, समझ लेते हैं कि आखिर इस 'बदले' और 'बगावत' की नौबत ही क्यों आई?
चंपई ने जो कुछ भी बयां किया, उससे झारखंड की सियासत के साथ-साथ झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं और नेताओं में क्या संदेश गया, ये तो साफ नहीं है, लेकिन झारखंड का शीर्ष नेतृत्व इस पर जवाब देने के लिए खुद मजबूर हो गया. फिलहाल, झारखंड और झारखंड मुक्ति मोर्चा की कमान संभाल रहे हेमंत सोरेन ने जवाब देते हुए अपने 'चाचा' को तो कुछ नहीं कहा, लेकिन केंद्र सरकार, भाजपा को जमकर खरी-खोटी सुना दी.
चंपई सोरेन ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में क्या-क्या लिखा?
मुझे मुख्यमंत्री रहते हुए किसी कार्यक्रम में जाने का हक नहीं? मेरे कार्यक्रमों को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से स्थगित करवाना आखिर क्या है? क्या लोकतंत्र में इससे ज्यादा कुछ अपमानजनक हो सकता है कि कोई भी मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को रद्द करा दे? ये अपमान का कड़वा घूंट ही था... पिछले 40 साल की बेदाग राजनीतिक सफर में ऐसा पहली बार था, जब मैं अंतर से टूट गया... ये बातें चंपई सोरेन की ओर से एक दिन पहले किए गए सोशल मीडिया पोस्ट का एक तरह से 'सार' है, जिसे पढ़कर आप समझ सकते हैं कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के 'चाचा' 'कोल्हान टाइगर' चंपई सोरेन ने कितना 'दुख-दर्द' सहा होगा.
अपने पोस्ट में चंपई ने ये भी कहा कि इतना होने के बावजूद मुझे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर अब मैं कहां जाऊं, क्या करूं, अपना दर्द किसे दिखाऊं. 3 जुलाई को बुलाई गई विधायक दल की बैठक के बाद दो दिनों तक चुपचाप अकेले बैठा रहा, खुद से सवाल-जवाब करता रहा, इस पूरे घटनाक्रम में अपनी गलतियों को तलाशता रहा, मुझे कुर्सी का लोभ या मोह तो नहीं था, लेकिन आत्मसम्मान भी कुछ होता है और ये दर्द जो अपनों से मिला था, उसे कहां जाहिर करता?
आगे उन्होंने कहा कि कई साल से पार्टी के केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक नहीं हो रही है. एक शख्स की ओर से एकतरफा फैसले लिए जा रहे हैं, तो ऐसे में मेरे साथ जो कुछ हुआ, उसे किसके पास रखता, किसे बताता, किसे जताता? हालांकि, झारखंड मुक्ति मोर्चा में मेरी गिनती सीनियर मेंबर्स के रूप में होती है, लेकिन मुझसे सीनियर JMM के सुप्रीमो हैं, जो अपनी तबीयत खऱाब होने की वजह से पर्दे के आगे नहीं हैं, फिर मेरे पास कोई विकल्प नहीं बचता, अगर वे एक्टिव होते तो हालात कुछ और होते, बात ही कुछ और होती.
हेमंत सोरेन ने 'कोल्हान टाइगर' के 'हमलों' क्या जवाब दिया?
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आरोप लगाया कि पैसे के दम पर 'घर' और पार्टी (JMM) को तोड़ा जा रहा है. इस साल के आखिर में राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए चंपई सोरेन के 'भतीजे' ने कहा कि झारखंड में चुनाव की घंटी बजने वाली है, लेकिन ये कब बजेगी, ये भी भाजपा ही जानती है, क्योंकि चुनाव आयोग तो अब संवैधानिक संस्था न होकर भाजपा की संस्था बन चुकी है. हेमंत ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर आज चुनाव करा दिए जाएं, तो कल झाड़ू-पोंछा मारकर इनको गुजरात भेजना होगा.
हेमंत ने ये भी कहा कि ये (भाजपा) गुजरात, असम, महाराष्ट्र से लोगों को लाकर हमारे आदिवासी, दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यकों में जहर बोते हैं और उन्हें एक दूसरे से लड़ाते हैं. ये तो समाज की बात है, ये लोग तो पार्टी और घर में भी तोड़फोड़ कराते हैं. कभी इसे खरीद लो, कभी उसे खरीद लो. उन्होंने ये भी कहा कि पैसा चीज ही ऐसी है कि कुछ नेताओं को इधर से उधर जाने में टाइम नहीं लगता. खैर, INDIA गठबंधन को कोई फर्क नहीं पड़ता और हम 2019 के विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से जनता के बीच खड़े हैं.
अब सवाल ये कि क्या चंपई के JMM छोड़ने का 'हेमंत सरकार' पर कितना असर?
राजनीतिक जानकारों की मानें, तो अगर चंपई सोरेन भाजपा में शामिल होते हैं, तो इसका मिलजुला असर पड़ेगा. चंपई के भाजपा में शामिल होने के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा इसे अलग तरह से भुनाने की कोशिश करेगी और भाजपा पर पैसों का लालच, केंद्रीय एजेंसियों का डर बताकर डैमेज कंट्रोल करना चाहेगी. कुछ महीने पहले जब लोकसभा चुनाव हुए थे, तब पार्टी ने हेमंत सोरेन को जेल भेजे जाने के पीछे भाजपा का षड्यंत्र बताया था और नतीजा ये हुआ कि भाजपा की राज्य में सीटें घट गईं, जबकि जेएमएम की सीटें बढ़ गईं. झारखंड की 81 विधानसभा सीटों में से 28 ट्राइबल सीटें हैं. 2019 के विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा और उसके सहयोगी दलों ने 28 में से 26 पर जीत दर्ज की थी.
अब चंपई के भाजपा में शामिल होने पर क्या असर होगा, इसे समझते हैं. राजनीतिक के जानकारों के मुताबिक, अगर चंपई भाजपा में आते हैं, तो भगवा पार्टी को आदिवासी वोट बैंक में सेंध लगाने में बड़ी सफलता मिलेगी, जो झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इसके अलावा, झारखंड मुक्ति मोर्चा में गुटबाजी भी हो सकती है, क्योंकि कहा जाता है कि चंपई सोरेन को जब इस्तीफा दिलवाया जा रहा था, तब पार्टी के कुछ नेताओं ने इस कदम का विरोध भी किया था. इसके अलावा, भाजपा भी खुद हेमंत सोरेन पर आरोप लगाती रही है कि पार्टी में सिर्फ उनकी ही चलती है. जेल से निकलने के बाद उन्होंने चंपई को तुरंत मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटा दिया. दरअसल, भाजपा ये संदेश देना चाहती है कि जेएमएम में सबकुछ हेमंत सोरेन का ही परिवार है.
झारखंड के कोल्हान प्रमंडल में चंपई सोरेन की अच्छी पकड़ मानी जाती है. जानकारों की मानें तो जमशेदपुर समेत पोटका, घाटशिला, बहरागोड़ा, ईचागढ़, सरायकेला-खरसावां और पश्चिमी सिंहभूम के विधानसभा क्षेत्रों में चंपई सोरेन की मजबूत पकड़ है. कुल मिलाकर झारखंड की 81 में से करीब 15 सीटों पर चंपई सोरेन की अच्छी खासी पकड़ मानी जाती है. अगर वे भाजपा में शामिल होते हैं, तो इस साल के आखिर में झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा को बड़ी लीड मिल सकती है. जिस कोल्हान प्रमंडल का चंपई को टाइगर बताया जाता है, उस प्रमंडल से फिलहाल झारखंड मुक्ति मोर्चा के 11 विधायक हैं.
और पढ़ें
- 'देवेंद्र फडणवीस को गिरफ्तार करना चाहती थी MVA, मैंने विरोध किया तो...', सीएम शिंदे के गंभीर आरोप
- 'बालासाहेब कभी नहीं चाहते थे कि राज ठाकरे...' , CM शिंदे ने बोला उद्धव ठाकरे पर जोरदार हमला
- 'JMM में मेरा अपमान हुआ...', बीजेपी में शामिल होने की अटकलों के बीच चंपई सोरेन का बड़ा बयान, कहा- तीनों विकल्प खुले हैं