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अब सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों की खैर नहीं, लोकसभा में पेश हुआ जन विश्वास विधेयक

लोकसभा में जन विश्वास विधेयक 2026 पेश हुआ, जिसमें सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के खिलाफ कड़े प्रावधान किए गए हैं. दोषियों पर भारी जुर्माना और सजा का प्रावधान शामिल किया गया है.

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Sagar Bhardwaj

केंद्र सरकार ने सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जे को रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया है. वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद  द्वारा लोकसभा में पेश जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026 में ऐसे मामलों के लिए सख्त दंड का प्रस्ताव रखा गया है. इस विधेयक का उद्देश्य न केवल कानून व्यवस्था को मजबूत करना है, बल्कि आम लोगों और कारोबार से जुड़े नियमों को भी सरल बनाना है. प्रस्तावित बदलावों से प्रशासनिक कार्रवाई तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है.

कड़े दंड का प्रावधान

सरकारी जमीन या परिसरों पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की जाएगी. प्रस्ताव के अनुसार, पहले महीने में संबंधित संपत्ति के लाइसेंस शुल्क का 40 गुना जुर्माना लगाया जाएगा. इसके बाद हर महीने इसमें 10 प्रतिशत की वृद्धि होगी. यह कदम अवैध कब्जों पर रोक लगाने के लिए प्रभावी माना जा रहा है.

जेल और जुर्माने दोनों का विकल्प

विधेयक में गैर-आवासीय सरकारी भूमि पर कब्जा करने वालों के लिए छह महीने तक की जेल या संपत्ति के मूल्य के अनुसार हर साल पांच प्रतिशत तक जुर्माना या दोनों सजा का प्रावधान रखा गया है. साथ ही, मजिस्ट्रेट को ऐसे मामलों में त्वरित बेदखली का आदेश देने का अधिकार भी दिया जाएगा, जिससे प्रक्रिया तेज हो सके.

79 कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव

इस विधेयक के तहत 23 मंत्रालयों से जुड़े 79 केंद्रीय कानूनों में बदलाव प्रस्तावित हैं. कुल 784 प्रावधानों में संशोधन की योजना है, जिनमें से 717 को अपराध की श्रेणी से हटाकर व्यापार को आसान बनाने की दिशा में कदम उठाया गया है. वहीं 67 प्रावधान आम लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बदले जाएंगे.

मोटर वाहन नियमों में राहत

विधेयक में मोटर वाहन अधिनियम से जुड़े 20 संशोधन भी शामिल हैं. इसके तहत वाहन पंजीकरण अब पूरे राज्य में कहीं भी कराया जा सकेगा. ड्राइविंग लाइसेंस समाप्त होने के बाद 30 दिन की छूट अवधि मिलेगी और नवीनीकरण नई तारीख से प्रभावी होगा. साथ ही, वाहन पंजीकरण रद्द करने की सूचना देने की समय सीमा को बढ़ाकर 30 दिन करने का प्रस्ताव है.