SIR

जम्मू में रोहिंग्या बस्तियों पर प्रशासन की कार्रवाई तेज, वन भूमि पर कथित अतिक्रमण के खिलाफ कदम

जम्मू में कथित अवैध बस्तियों के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है. पहले जिला प्रशासन की ओर से उन जमीन मालिकों को नोटिस जारी किए गए

AI Generated
Shilpa Srivastava

जम्मू में कथित अवैध बस्तियों के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है. पहले जिला प्रशासन की ओर से उन जमीन मालिकों को नोटिस जारी किए गए, जिनकी निजी जमीन पर रोहिंग्या परिवारों के रहने की बात सामने आई थी. अब वन भूमि पर कथित अतिक्रमण को लेकर वन विभाग की कार्रवाई भी सामने आई है.

जम्मू में रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की मौजूदगी तथा उनके बसने को लेकर लंबे समय से बहस जारी है. राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों की ओर से सवाल उठाए जाते रहे हैं कि ये बस्तियां कैसे बनीं और निजी या सरकारी जमीन पर परिवारों को बसने के लिए जमीन किसने उपलब्ध कराई.

कई इलाकों से रोहिंग्या परिवारों की मौजूदगी की रिपोर्ट:

रिपोर्टों के मुताबिक, जम्मू शहर और आसपास के नारवाल, भटिंडी, सुंजवां तथा बहू फोर्ट सहित कई इलाकों में रोहिंग्या बस्तियां रही हैं. इसके अलावा लद्दाखी कॉलोनी, अपर ठठेर, पूंछ कॉलोनी, गुड़ा ब्राह्मणा और चिनौर जैसे इलाकों में भी रोहिंग्या परिवारों की मौजूदगी की रिपोर्ट सामने आती रही है.


इस मुद्दे पर आंकड़ों को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं. उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में जम्मू संभाग के दस जिलों में 6,737 रोहिंग्या और 46 बांग्लादेशी नागरिकों से संबंधित डेटा एक केंद्रीय समिति के समक्ष रखा गया था. वहीं, सरकारी डेटाबेस के हवाले से जम्मू और सांबा जिलों में रोहिंग्या तथा बांग्लादेशी नागरिकों समेत 13,700 से अधिक विदेशी नागरिकों का आंकड़ा भी रिपोर्ट किया गया है.

हाई-लेवल पैनल ने किया जम्मू का दौरा:

अगस्त 2026 में केंद्र की ओर से गठित एक हाई-लेवल पैनल ने भी जम्मू का दौरा किया था. पैनल ने सरकारी अधिकारियों और विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की तथा नारवाल इलाके में रोहिंग्या बस्ती का निरीक्षण किया. इस पैनल का उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों में अवैध आव्रजन और अन्य कारणों से होने वाले जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करना है.

प्रशासन की ताजा कार्रवाई के बाद जम्मू में कथित अवैध कब्जों, जमीन के अनधिकृत इस्तेमाल और बस्तियों के लिए जमीन उपलब्ध कराने वालों की भूमिका को लेकर सवाल फिर उठने लगे हैं. अब इस मामले में प्रशासन की आगे की कार्रवाई और कथित अतिक्रमण से जुड़े मामलों में होने वाली जांच पर नजर रहेगी.