गौरी लंकेश हत्याकांड के आरोपी को जालना नगर निगम चुनाव में मिली जीत, जश्न का वीडियो आया सामने

जालना नगर निगम चुनाव में गौरी लंकेश हत्याकांड के आरोपी श्रीकांत पांगारकर ने वार्ड 13 से निर्दलीय जीत दर्ज की. उनकी जीत ने राजनीति और समाज में नई बहस छेड़ दी है.

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Kuldeep Sharma

मुंबई: महाराष्ट्र के जालना नगर निगम चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर राजनीति और नैतिकता के सवाल खड़े कर दिए हैं. चर्चित पत्रकार गौरी लंकेश हत्याकांड के आरोपी श्रीकांत पांगारकर ने वार्ड नंबर 13 से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की है. नतीजे सामने आते ही पांगारकर समर्थकों के साथ जश्न मनाते नजर आए. यह जीत इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि पांगारकर पर गंभीर आपराधिक आरोप लंबित हैं और उनका राजनीतिक सफर विवादों से भरा रहा है.

जालना नगर निगम चुनाव का चौंकाने वाला परिणाम

जालना नगर निगम चुनाव में वार्ड 13 का परिणाम सबसे अधिक चर्चा में रहा. यहां से निर्दलीय उम्मीदवार श्रीकांत पांगारकर ने भाजपा सहित अन्य दलों के प्रत्याशियों को हराकर जीत दर्ज की. खास बात यह रही कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने इस वार्ड से कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा था. नतीजों के बाद पांगारकर ने समर्थकों के साथ सार्वजनिक रूप से जीत का जश्न मनाया, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए.

गौरी लंकेश हत्याकांड से जुड़ा नाम

श्रीकांत पांगारकर का नाम वर्ष 2017 में वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के बाद राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया था. 5 सितंबर 2017 को बेंगलुरु स्थित उनके आवास के बाहर गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई थी. इस घटना ने पूरे देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, उदारवाद और सांप्रदायिकता को लेकर तीखी बहस छेड़ दी थी. पांगारकर इस मामले में आरोपी हैं और मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है.

पांगारकर का राजनीतिक सफर

पांगारकर पहले अविभाजित शिवसेना से जुड़े रहे हैं. वे 2001 से 2006 तक जालना नगर परिषद के सदस्य भी रह चुके हैं. वर्ष 2011 में टिकट न मिलने के बाद उन्होंने हिंदुत्ववादी संगठन हिंदू जनजागृति समिति का दामन थाम लिया. नवंबर 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले वे शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हुए थे, लेकिन भारी विरोध के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उनकी पार्टी में एंट्री को फिलहाल स्थगित कर दिया था.+

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एटीएस गिरफ्तारी और गंभीर आरोप

अगस्त 2018 में महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने पांगारकर को राज्य के विभिन्न हिस्सों से कच्चे बम और हथियार बरामद होने के मामले में गिरफ्तार किया था. उन पर विस्फोटक अधिनियम, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और यूएपीए जैसी गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किए गए थे. इन मामलों ने उनकी छवि को और विवादास्पद बना दिया, बावजूद इसके वे स्थानीय राजनीति में सक्रिय बने रहे.

जमानत और जीत के बाद उठते सवाल

गौरी लंकेश हत्याकांड में कर्नाटक हाईकोर्ट ने 4 सितंबर 2024 को पांगारकर को जमानत दी थी. जमानत के कुछ महीनों बाद नगर निगम चुनाव में उनकी जीत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि गंभीर आरोपों का सामना कर रहे व्यक्ति की चुनावी जीत लोकतंत्र और राजनीतिक नैतिकता पर बहस को जन्म देती है. वहीं, उनके समर्थक इसे जनता का फैसला बता रहे हैं.