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तहव्वुर राणा को भारत लाने में लगे 14 साल, एनआईए ने लड़ी लंबी लड़ाई

26/11 हमलों के साजिशकर्ता तहव्वुर राणा को अमेरिका से भारत लाने में करीब 14 साल लग गए. पर्दे के पीछे भारत की कुशल कूटनीतिक चालों ने सुनिश्चित किया कि कोई अड़चन न आए. हालांकि, 2009 में मुंबई पुलिस द्वारा दायर पहली चार्जशीट में उनका नाम नहीं था. राणा के बारे में पहली बार 2011 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा चार्जशीट में किया गया था. चार्जशीट में जिसमें मुख्य साजिशकर्ताओं के नाम भी शामिल हैं एनआईए ने विस्तार से बताया कि कैसे राणा ने अपने इमिग्रेशन कंसल्टेंसी व्यवसाय के ज़रिए लश्कर-ए-तैयबा के जासूस डेविड कोलमैन हेडली को रसद और वित्तीय सहायता प्रदान की.

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Gyanendra Sharma

Mumbai Terror Attack accused Tahawwur Rana 2008: मुंबई आतंकी हमलों का साजिशकर्ता में से एक तहव्वुर राणा भारत लाया जा रहा है.  तहव्वुर राणा को अमेरिका से भारत लाने और मुकदमे का सामना करने में करीब 14 साल लगे. फरवरी में व्हाइट हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आखिरकार प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी. 2011 में उसके खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल होने के बाद से कानूनी प्रक्रियाओं और समीक्षा याचिकाओं के दलदल ने राणा के प्रत्यर्पण को रोक दिया.

4 अप्रैल को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राणा के प्रत्यर्पण पर रोक लगाने की अंतिम याचिका को खारिज करने के बाद उसके सभी कानूनी विकल्प समाप्त हो गए. हालांकि, पर्दे के पीछे भारत की  कूटनीतिक चालों ने सुनिश्चित किया कि आगे कोई अड़चन न आए. तहव्वुर राणा को लश्कर-ए-तैयबा से संबंध रखने और पैगंबर के कार्टून प्रकाशित करने वाले डेनमार्क के एक समाचार पत्र के कार्यालय पर हमला करने की साजिश रचने के आरोप में अक्टूबर 2009 में शिकागो में गिरफ्तार किया गया था.

2011 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने लड़ी लंबी लड़ाई

हालांकि, 2009 में मुंबई पुलिस द्वारा दायर पहली चार्जशीट में उनका नाम नहीं था. राणा के बारे में पहली बार 2011 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा चार्जशीट में किया गया था. चार्जशीट में जिसमें मुख्य साजिशकर्ताओं के नाम भी शामिल हैं एनआईए ने विस्तार से बताया कि कैसे राणा ने अपने इमिग्रेशन कंसल्टेंसी व्यवसाय के ज़रिए लश्कर-ए-तैयबा के जासूस डेविड कोलमैन हेडली को रसद और वित्तीय सहायता प्रदान की. हेडली ने मुंबई में लश्कर के 10 आतंकवादियों के शहर में उत्पात मचाने से दो साल पहले तक लक्ष्यों का सर्वेक्षण किया था. हालांकि, यह राणा का बचपन का दोस्त हेडली था, जिसने उसे फंसाया और 2016 में मुंबई की एक विशेष अदालत के समक्ष गवाही देते समय इसका खुलासा किया. 

2020 में अनंतिम गिरफ्तारी वारंट पर हस्ताक्षर

2019 में भारत ने आधिकारिक तौर पर राणा के प्रत्यर्पण के लिए अमेरिका को एक राजनयिक नोट सौंपा था. 10 जून, 2020 को भारत ने प्रत्यर्पण के उद्देश्य से पूर्व पाकिस्तानी सेना अधिकारी की अनंतिम गिरफ्तारी की मांग करते हुए एक शिकायत दर्ज की. भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध के आधार पर, कैलिफोर्निया की एक अदालत ने 2020 में एक अनंतिम गिरफ्तारी वारंट पर हस्ताक्षर किए. राणा ने खतरे के आधार पर इसका विरोध किया. उनकी कानूनी टीम ने तर्क दिया कि चूंकि राणा पर पहले भी इसी तरह के आरोपों में मुकदमा चलाया जा चुका है, इसलिए उस पर फिर से मुकदमा चलाना गैरकानूनी होगा. मजिस्ट्रेट जज ने उनके अनुरोध को अस्वीकार कर दिया.

उस समय अमेरिका के राष्ट्रपति जो बिडेन थे, जिन्होंने 1997 में दोनों देशों द्वारा हस्ताक्षरित संधि के आधार पर राणा के भारत प्रत्यर्पण का समर्थन किया था. 2020 से राणा ने निचली और संघीय अदालतों में अपने प्रत्यर्पण के खिलाफ कई याचिकाएं दायर कीं, लेकिन उन्हें कोई सफलता नहीं मिली. सैन फ्रांसिस्को में उत्तरी सर्किट के लिए अपील न्यायालय द्वारा उसके प्रत्यर्पण का आदेश दिए जाने के बाद उसने नवंबर 2024 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

11 फरवरी को प्रत्यर्पण पर आखिरी मुहर

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने के एक दिन बाद 21 जनवरी को राणा की प्रत्यर्पण पर रोक लगाने की समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया. प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से एक दिन पहले 11 फरवरी को विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने राणा के भारत प्रत्यर्पण को औपचारिक रूप से अधिकृत किया. प्रधानमंत्री मोदी के साथ संयुक्त मीडिया ब्रीफिंग में ट्रंप ने इसकी सार्वजनिक घोषणा की.