इजरायल को भी भा गया लक्षद्वीप; डिसेलिनेशन प्रोजेक्ट का किया ऐलान, जानें क्या है ये वर्ल्ड फेमस टेक्निक?
मालदीव बनाम लक्षद्वीप मुद्दे के बीच भारत को इजरायल का साथ मिला है. इजरायल ने लक्षद्वीप के समुद्री तटों के पानी को साफ करने के लिए डिसेलिनेशन प्रोजेक्ट का ऐलान किया है. इस दौरान इजरायल ने लक्षद्वीप की सुंदरता की जमकर तारीफ भी की है.
Israel project desalination to beautify Lakshadweep: मालदीव बनाम लक्षद्वीप मुद्दे के बीच इजरायल की एंट्री हो गई है. इजरायल ने मलदीव के मुकाबले लक्षद्वीप की खूबसूरती की जमकर तारीफ की है. साथ ही इसे पर्यटन के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए खास प्रोजेक्ट की घोषणा भी की है. इजरायल की ओर से जिस प्रोजेक्ट की घोषणा की गई है, उसके जरिए लक्षद्वीप के समुद्री तटों के पानी को साफ किया जाएगा.
इजरायल इन इंडिया नाम के एक्स हैंडल से इस संबंध में जानकारी दी गई है. एक्स हैंडल से लक्षद्वीप की कुछ खूबसूरत तस्वीरें और वीडियो को शेयर भी किया गया. कहा गया है कि पिछले साल ही भारत की ओर से 'डिसेलिनेशन प्रोजेक्ट' को शुरू करने का अनुरोध हमें मिला था. अनुरोध के बाद इजरायल की एक टीम लक्षद्वीप भी गई थी. अब हम इस प्रोजेक्ट पर काम करने को तैयार हैं.
जानें क्या होती है डिसेलिनेशन टेक्निक?
इजरायल समुद्र से घिरा हुआ है और वहां पीने के पानी की दिक्कत होती है. चूंकि समुद्र का पानी खारा होता है, इसलिए इजरायल डिसेलिनेशन टेक्निक के जरिए खारे पानी को मीठे पानी में तब्दील कर देता है, जिससे पीने के पानी की समस्या खत्म हो जाती है. अब लक्षद्वीप में भी पीने के पानी की दिक्कत है, इसलिए इस टेक्निक के जरिए इजरायल लक्षद्वीप के समुद्री किनारों पर खारे पानी को मीठे पानी में तब्दील करेगा. इस टेक्निक के जरिए पानी को साफ भी किया जाता है.
कैसे शुरू हुआ लक्षद्वीप-मालदीव विवाद?
पीएम मोदी की हालिया लक्षद्वीप यात्रा के बाद जब बीते 4 जनवरी को उन्होंने सोशल मडिया पर लक्षद्वीप की प्राकृतिक सुंदरता की तस्वीरें साझा करते हुए लोगों को लक्षद्वीप घूमने के लिए कहा तो उसके बाद सोशल मीडिया पर लक्षद्वीप ट्रेंड करने लगा. ये बात मालदीव के कुछ नेताओं को रास नहीं और उन्होंने पीएम मोदी की लक्षद्वीप यात्रा पर टिप्पणी कर दी, जिसके बाद मामले ने और तूल पकड़ी. आलम ये हुआ की मालदीव सरकार ने उन तीन नेताओं को मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया जिन्होंने भारत को लेकर टिप्पणी की थी. वहीं, लक्षद्वीप गूगल पर पिछले 20 सालों में सबसे ज्यादा बार इस साल सर्च किया गया.
कोरोना काल में भी मालदीव के लिए सहारा बना था भारत
2020 के शुरुआती महीनों में जब पूरा विश्व कोरोना महामारी से जूझ रहा था, तब भारत ने कोरोना वैक्सीन बनाने में सफलता हासिल की थी. भारत ने वैक्सीन के जरिए कई देशों की मदद की थी. इसके अलावा, भारत, मालदीव के लिए इस समय सबसे बड़ा बाजार के रूप में सामने आया. कोरोना काल में 60 हजार से अधिक भारतीय घूमने के लिए मालदीव पहुंचे. इसके बाद 2021 में ये संख्या करीब 3 लाख पहुंच गई. एक साल बाद यानी 2022 में भारत से मालदीव जाने वाले पर्यटकों की संख्या थोड़ी घटकर 2.41 लाख पहुंची. पिछले साल यानी 2023 में भारत से करीब 2 लाख पर्यटक मालदीव पहुंचे थे.
बता दें कि कोरोना से पहले भी मालदीव के टूरिज्म को बढ़ाने में भारतीयों को योगदान था. साल 2018 में मालदीव घूमने वाले कुल पर्यटकों की संख्या 14 लाख, 84 हजार, 274 थी, जिसमें से करीब 6.1 फीसदी यानी 90 हजार 474 से अधिक टूरिस्ट भारत से थे. एक साल बाद यानी कोरोना से ठीक पहले 2019 में भारत के 1 लाख 66 हजार से अधिक सैलानी मालदीव पहुंचे थे.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मालदीव की अर्थव्यवस्था काफी हद तक पर्यटन पर निर्भर है, जिसमें भारतीयों का योगदान काफी है. इसे देखते हुए मालदीव सरकार कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी, जिसके कारण तीनों मंत्रियों को सस्पेंड कर दिया गया. वैसे सिर्फ पर्यटन ही नहीं, कई अन्य चीजें हैं, जिसके लिए मालदीव भारत पर निर्भर है. बता दें कि मालदीव की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से टूरिज्म पर निर्भर है. ये सरकार के राजस्व का भी सबसे बड़ा सोर्स है. टूरिज्म से मालदीव के लोगों को बड़ी संख्या में रोजगार भी मिलता है. कहा जाता है कि मालदीव के कुल रोजगार में करीब 70 फीसदी योगदान पर्यटन का है.
इन मामलों में भारत पर निर्भर है मालदीव
टूरिज्म के अलावा मालदीव सरकार स्क्रैप, इंजीनियरिंग और इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट (फार्मास्यूटिकल्स, रडार उपकरण, रॉक बोल्डर, सीमेंट) निर्यात करता है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में भारत, मालदीव का तीसरा सबसे बड़ा कारोबारी भागीदार था. इसके अलावा, मालदीव एग्रीकल्चर प्रोडक्ट (चावल, मसाले, फल, सब्जियां और पोल्ट्री) भी भारत से लेता है.