स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अब नहीं होगा भारतीय जहाजों पर हमला! एस जयशंकर ने एक फोन से ईरान के साथ कर ली डील डन

मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बुरी तरह प्रभावित हुआ है. हालांकि अब भारत की परेशानी जल्द ही खत्म हो सकती है. भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास आराघची से फोन पर बातचीत की, जिसके बाद भारतीय टैंकरों को उस रास्ते से जाने की अनुमति दे दी गई है.

ANI, @Anviyadavsocial
Shanu Sharma

मिडिल ईस्ट में चल रहे जंग के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर आई है. भारत और ईरान के बीच उच्च-स्तरीय कूटनीतिक बातचीत का अच्छा नतीजा आया है. भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरानी ईरानी विदेश मंत्री अब्बास आराघची के से फोन पर बातचीत की.

मिल रही जानकारी के मुताबिक इस फोन कॉल के बाद ईरान ने भारत-झंडाधारी टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की इजाजत दे दी. रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय टैंकर 'पुष्पक' और 'परिमल' होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से निकलते नजर आया है. इस बात की पुष्टि समुद्री ट्रैकिंग डेटा द्वारा की गई है. हालांकि अभी भी कई देशों के जहाज सुरक्षा जोखिम के कारण किनारे पर खड़े हैं.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ने बढ़ाई दुनिया की चिंता 

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए काफी जरूरी है, क्योंकि भारत अपनी अधिकांश तेल आपूर्ति खाड़ी देशों से इसी मार्ग से प्राप्त करता है. यह रास्ता दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है. इस रास्ते से वैश्विक तेल का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है. दो हफ्ते से चल रहे ईरान-अमेरिका जंग के बीच होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान सैनिकों द्वारा हमला किया जा रहा था. जिसके कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा झटका लगा है. लोगों के रोजमर्रा का जीवन भी प्रभावित होने लगा है. इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी झटका लगा. हालांकि ईरान ने अभी भी यह साफ किया है कि वह अमेरिका और उसके सहयोगियों के तेल को होर्मुज से नहीं गुजरने देगा.

भारतीय कूटनीति की सफलता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद ईरानी अधिकारी ने कहा था कि हम इस रास्ते से एक भी लीटर तेल अमेरिका और उसके सहयोगियों तक पहुंचने नहीं देंगे. ईरन इस रास्ते को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है. भारत में भी रास्ता प्रभावित होने के कारण एलपीजी की समस्या बढ़ने लगी. हालांकि इसी बीच जयशंकर और आराघची के बीच कई दौर की बातचीत हुई. इस बातचीत के दौरान क्षेत्रीय स्थिरता और जहाजों की सुरक्षा पर फोकस किया गया. जिसका नतीजा यह हुआ कि भारतीय झंडे वाले जहाजों को वहां से जाने की अनुमति दे दी गई. इसे भारत की कूटनीति की सफलता बताई जा रही है.