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भारत आयातित LPG पर कितना निर्भर है, मिडिल ईस्ट में तनाव से देश में कितना बड़ा तेल-गैस संकट?

भारत की रसोई गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा होता है. 2024-25 में करीब 66% एलपीजी विदेशों से आई, जिसमें 92% सप्लाई मध्य-पूर्व से रही, जिससे वैश्विक तनाव का सीधा असर पड़ सकता है.

ani
Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत में एलपीजी की कीमतों और आपूर्ति को लेकर नई चिंता सामने आई है. हाल के आंकड़े बताते हैं कि देश की रसोई गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है. खास बात यह है कि इन आयातों का अधिकांश हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आता है.

ऐसे में अगर उस क्षेत्र में संघर्ष या आपूर्ति बाधित होती है तो इसका असर भारत के घरेलू उपभोक्ताओं, रेस्तरां और उद्योगों पर सीधे पड़ सकता है. यही वजह है कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है.

भारत की एलपीजी जरूरतें और आयात

भारत में एलपीजी का उपयोग घरों से लेकर होटल और छोटे कारोबारों तक व्यापक रूप से होता है. वित्त वर्ष 2024-25 में देश की कुल घरेलू एलपीजी जरूरतों का लगभग 66 प्रतिशत हिस्सा आयात से पूरा किया गया.

इसका मतलब यह है कि देश अभी भी अपनी जरूरत का बड़ा भाग विदेशों से आने वाली गैस पर निर्भर करता है. यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलावों का असर भारत के गैस बाजार पर जल्दी दिखाई देता है.

मध्य-पूर्व पर भारी निर्भरता

भारत की एलपीजी आपूर्ति का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है. पिछले वित्त वर्ष में कुल आयात का लगभग 92 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र से आया. इनमें संयुक्त अरब अमीरात सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा, जहां से करीब 40 प्रतिशत गैस आई. इसके बाद कतर से लगभग 22 प्रतिशत और सऊदी अरब तथा कुवैत से करीब 15-15 प्रतिशत एलपीजी भारत पहुंची.

तनाव बढ़ने पर क्यों बढ़ती चिंता

जब खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है तो ऊर्जा बाजार तुरंत प्रभावित होता है. हाल में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी ने भी चिंता बढ़ाई है. यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का अहम रास्ता माना जाता है. अगर यहां आपूर्ति बाधित होती है तो भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है.

सरकार के कदम और आगे की रणनीति

स्थिति को देखते हुए सरकार ने आपूर्ति व्यवस्था पर निगरानी बढ़ा दी है. अधिकारियों ने उद्योगों में एलपीजी के उपयोग को सीमित कर घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं. रिफाइनरियों से उत्पादन बढ़ाने को कहा गया है और आयातकों से नियमित रूप से भंडार की जानकारी मांगी जा रही है. इन कदमों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के बावजूद देश में रसोई गैस की उपलब्धता प्रभावित न हो.