स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय नौसेना का दबदबा, शिवालिक और नंदा देवी जहाज को मिला सुरक्षित रास्ता
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय नौसेना दो बड़े LPG टैंकरों को सुरक्षा कवच प्रदान कर रही हैं...
ईरान युद्ध के बीच भारतीय नौसेना ने रणनीतिक समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी ताकत दिखाई है. नौसेना के युद्धपोत ओमान की खाड़ी में तैनात कर दिए गए हैं, जो भारत की ऊर्जा जरूरतों को लेकर आ रहे दो बड़े LPG टैंकरों को सुरक्षा कवच प्रदान कर रहे हैं. सैटेलाइट तस्वीरों और मैरीटाइम ट्रैकिंग डेटा से पुष्टि हुई है कि भारतीय ध्वज वाला LPG टैंकर शिवालिक इस संवेदनशील जलडमरूमध्य को पार करने के बाद अब नौसेना के जहाजों की छत्रछाया में आगे बढ़ रहा है.
X पर दी जानकारी
OSINT विशेषज्ञ डेमियन साइमन ने सोशल मीडिया मंच 'X' पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि क्षेत्र में अस्थिर सुरक्षा स्थिति के मद्देनजर भारतीय नौसेना ने तीन युद्धपोत तैनात किए हैं, जो वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा के लिए सक्रिय रूप से गश्त कर रहे हैं.
ऑपरेशन संकल्प
नौसेना सूत्रों के अनुसार, यह तैनाती ऑपरेशन संकल्प के तहत नियमित समुद्री सुरक्षा अभियान का हिस्सा है. हालांकि, रिपोर्ट किए गए इलेक्ट्रॉनिक व्यवधानों के चलते इस क्षेत्र में जहाजों की लोकेशन ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है.
दो टैंकरों ने जलडमरूमध्य को पार किया
गौरतलब है कि सरकारी स्वामित्व वाली शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के इन दोनों टैंकरों शिवालिक और नंदा देवी ने पिछले दो हफ्तों में क्षेत्र में जारी संघर्ष के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार किया है. ये दोनों जहाज करीब 85,000 मीट्रिक टन लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस ले जा रहे हैं, जो कतर के विशाल निर्यात केंद्र रास लफ़ान से लोड की गई थी.
भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की संभावना
खुफिया जानकारी बताती है कि यह सुरक्षित आवाजाही हाल ही में नई दिल्ली और तेहरान के बीच हुई कूटनीतिक वार्ता का नतीजा हो सकती है. फिलहाल ये टैंकर अपनी निर्धारित गति से भारत की ओर बढ़ रहे हैं और अगले सप्ताह की शुरुआत में इनके भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की संभावना है.
आपको बता दें कि भारत अपनी घरेलू LPG जरूरतों को पूरा करने के लिए खाड़ी देशों के आयात पर बहुत अधिक निर्भर करता है. ऐसे में अगर सप्लाई चेन बाधित होती, तो देश में गैस की कीमतों में भारी उछाल आ सकता था, लेकिन भारतीय नौसेना की मुस्तैदी और सरकार की कूटनीति ने यह साबित कर दिया है कि संकट के समय में भी देश की ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह से सुरक्षित हाथों में है.