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बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार के 2200 मामले सामने आए. भारत के कट्टर दुश्मन पाकिस्तान को मीलों पीछे छोड़ा

भारत-बांग्लादेश के संबंधों में हाल ही में तनाव देखा गया, जब प्रधानमंत्री शेख हसीना को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बीच देश से बाहर जाना पड़ा. इसके कुछ दिन बाद, नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद युनूस ने सत्ता संभाली, जब हसीना भारत में शरण लेने के लिए मजबूर हुईं.

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Mayank Tiwari

विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार (20 दिसंबर) को खुलासा किया कि पड़ोसी देश बांग्लादेश में साल 2024 में शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार के गिरने के बाद हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के 2,200 मामले सामने आए. सरकार ने बताया कि इसी अवधि के दौरान पाकिस्तान में भी ऐसे 112 मामले सामने आए.  राज्यसभा में आंकड़े पेश करते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसने बांग्लादेश और पाकिस्तान दोनों को पत्र लिखकर संबंधित सरकारों से अपने देशों में हिंदुओं की सुरक्षा, संरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने को कहा है.

विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, "सरकार ने इन घटनाओं को गंभीरता से लिया है और बांग्लादेश सरकार के साथ अपनी चिंताओं को साझा किया है. भारत को उम्मीद है कि बांग्लादेश सरकार हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी. इसके अलावा विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा कि, "भारत सरकार राजनयिक माध्यमों से अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा का मुद्दा उठाती है.

भारत का स्पष्ट संदेश

इसके साथ ही विदेश मंत्रालय पाकिस्तान सरकार से अल्पसंख्यक समुदायों पर धार्मिक असहिष्णुता, सांप्रदायिक हिंसा, व्यवस्थागत उत्पीड़न और हमलों को रोकने तथा उनकी सुरक्षा, संरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने का आग्रह करती है. भारत उचित अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की दुर्दशा को उजागर करना जारी रखेगा.

2024 में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की बढ़ती घटनाएं

पेश किए गए किए गए आंकड़ों के अनुसार, बांग्लादेश में 2022 में हिंदुओं के खिलाफ 47, 2023 में 302 और 2024 (8 दिसंबर तक) में 2,200 हिंसक घटनाएँ रिपोर्ट की गईं. वहीं, पाकिस्तान में 2022 में 241, 2023 में 103 और 2024 (अक्टूबर तक) में 112 मामले सामने आए. सरकार ने यह भी कहा कि बांग्लादेश और पाकिस्तान के अलावा किसी भी पड़ोसी देश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा का कोई मामला सामने नहीं आया. इसमें कहा गया है, "अन्य पड़ोसी देशों (पाकिस्तान और बांग्लादेश को छोड़कर) में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के मामले - शून्य हैं.

सरकार ने इन घटनाओं को गंभीरता से लिया- कीर्ति वर्धन सिंह

विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने अल्पसंख्यक एवं मानवाधिकार संगठनों के आंकड़ों का हवाला देते हुए राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी. केंद्रीय मंत्री ने अपने जवाब में यह भी कहा कि "सरकार ने इन घटनाओं को गंभीरता से लिया है और बांग्लादेश सरकार के साथ अपनी चिंताओं को साझा किया है. उन्होंने कहा, "भारत की अपेक्षा है कि बांग्लादेश हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा. 9 दिसंबर, 2024 को विदेश सचिव की बांग्लादेश यात्रा के दौरान भी यही बात दोहराई गई थी.