UNSC में ईरान के खिलाफ 135 देशों ने लाया प्रस्ताव, भारत ने किसका किया समर्थन?

यह प्रस्ताव खाड़ी देश बहरीन की पहल पर लाया गया था और कई देशों ने इसका समर्थन किया. प्रस्ताव को परिषद के 15 सदस्यों में से 13 देशों ने समर्थन दिया, जबकि स्थायी सदस्य चीन और रूस ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया और तटस्थ रहे.

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Sagar Bhardwaj

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्पष्ट रुख दिखाया है. भारत ने 135 देशों के साथ मिलकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें ईरान के खाड़ी देशों पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की गई है. इस प्रस्ताव में ईरान से तुरंत सभी हमले रोकने की मांग की गई है.

चीन और रूस ने मतदान में नहीं लिया हिस्सा

यह प्रस्ताव खाड़ी देश बहरीन की पहल पर लाया गया था और कई देशों ने इसका समर्थन किया. प्रस्ताव को परिषद के 15 सदस्यों में से 13 देशों ने समर्थन दिया, जबकि स्थायी सदस्य चीन और रूस ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया और तटस्थ रहे.

भारत का यह रुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान के अनुरूप है, जिसमें उन्होंने खाड़ी देशों पर हुए हमलों की निंदा करते हुए कहा था कि ऐसे हमले किसी भी देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ हैं.

प्रस्ताव में कहा गया है कि खाड़ी क्षेत्र के देशों की स्वतंत्रता, संप्रभुता और राजनीतिक व्यवस्था का सम्मान किया जाना चाहिए. इसमें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, ओमान, कुवैत और जॉर्डन जैसे देशों के समर्थन की बात दोहराई गई है.

संयुक्त राष्ट्र में पेश इस प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि किसी भी देश पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और इससे वैश्विक शांति और सुरक्षा को खतरा पैदा होता है. इसलिए ईरान से तुरंत अपने हमले और उकसाने वाली गतिविधियां बंद करने को कहा गया है.

प्रस्ताव में समुद्री सुरक्षा पर भी चिंता जताई गई. खास तौर पर महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को बाधित करने या उसे बंद करने की धमकी की निंदा की गई है. यह रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है.

संयुक्त राष्ट्र ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार व्यापारिक और मालवाहक जहाजों को सुरक्षित तरीके से यात्रा करने का अधिकार होना चाहिए. इसके साथ ही आम नागरिकों और उनके ठिकानों पर हमलों की भी कड़ी आलोचना की गई. प्रस्ताव में सभी देशों से शांति बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने की अपील की गई है ताकि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे.