Budget 2026

Budget 2026: सेमीकंडक्टर मिशन 2.O के लिए 40000 करोड़, ऑटो सेक्टर के लिए निर्मला सीतारमण का बड़ा ऐलान

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आम बजट 2026 संसद में पेश कर रही हैं. इस दौरान उन्होंने भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की शुरुआत का ऐलान किया है. पहले चरण की सफलता के बाद अब 40 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट इसके लिए दिया गया है. इसका टारगेट सेमीकंडक्टर के पूरे मूल्य-श्रृंखला को मजबूत करना और स्वदेशी डिजाइन और उच्च-मूल्य उत्पादन को बढ़ावा देना है.

ani
Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सदन में बजट पेश करने के दौरान भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 की शुरुआत की घोषणा की है. पहले चरण में मिली सफलता के आधार पर अब सरकार ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र को और मजबूत करने का फैसला लिया है. नए मिशन के लिए 40,000 करोड़ का बजट रखा गया है. इसका लक्ष्य सिर्फ उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि उपकरण, सामग्री, स्वदेशी आईपी डिजाइन और 45 महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं तक सेल्फ डिपेंडेंट बनना है.

मिशन 2.0 के नए लक्ष्य

ISM 2.0 में अब पूरी मूल्य-श्रृंखला पर फोकस किया जाएगा. इसमें उपकरण और सामग्री उत्पादन से लेकर स्वदेशी डिजाइन तक सब कुछ शामिल है. वित्त मंत्री ने बताया कि अब सिर्फ असेंबली नहीं, बल्कि तकनीकी गहराई को पैदा किया जाएगा. साथ ही 45 महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने से भारत वैश्विक स्तर पर आत्मनिर्भर भी बनेगा.

उद्योग-नेतृत्व वाले रिसर्ट सेंटर

नए मिशन में उद्योग के नेतृत्व वाले रिसर्च सेंटर और ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे. ये सेंटर अकादमिक नवाचार को व्यावसायिक उत्पादन से जोड़ेंगे. इससे कुशल वर्कफोर्स तैयार होगा और स्वदेशी तकनीक तेजी से आगे बढ़ सकेगी. मंत्री ने जोर दिया कि क्षमता के साथ-साथ नवाचार पर भी ध्यान दिया जाएगा.

ईसीएमएस योजना को मिला बढ़ावा

अप्रैल 2025 में शुरू हुई इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) को अब 40 हजार करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया है. इस योजना ने पहले ही टारगेट से दोगुना निवेश आकर्षित किया है. वैश्विक कंपनियां भी भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला में शामिल हो रही हैं. इससे उच्च-मूल्य वाले इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप उत्पादन में तेजी आ रही है.

पूंजीगत सामान और बुनियादी ढांचे पर जोर

सरकार ने पूंजीगत सामान क्षेत्र को मजबूत करने के लिए भी बड़े कदम उठाए हैं. दो स्थानों पर उच्च-तकनीकी टूल रूम बनाए जाएंगे, जो डिजिटल और ऑटोमोटिक सेवा केंद्र के रूप में कार्य करेंगे. ये सुविधाएं उन्नत परीक्षण, डिजाइन और सटीक निर्माण उपलब्ध कराएंगी. इससे इंपोर्ट पर डिपेंडेंसी कम होगी और इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर व इंजीनियरिंग क्षेत्रों की क्वालिटी बढ़ेगी.