मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मंत्रियों की बैठक, सप्लाई चेन और ऊर्जा सुरक्षा पर पैनी नजर
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में अंतर-मंत्रालयी पैनल की बैठक हुई. इसमें पश्चिम एशिया संकट से भारतीयों को सुरक्षित रखने, ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने और जमाखोरी के खिलाफ सख्त कदम उठाने पर चर्चा हुई.
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है. भारत सरकार इस स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है. नई दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देशवासियों को आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार युद्ध के संभावित प्रभावों से भारतीयों को बचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 'टीम इंडिया' भावना के साथ इस वैश्विक संकट का मुकाबला करने की ठोस रणनीति तैयार की गई है.
राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में गठित इस विशेष पैनल में हरदीप सिंह पुरी, जितेंद्र सिंह, राम मोहन नायडू और किरेन रिजिजू जैसे अनुभवी मंत्रियों को शामिल किया गया है. इस पैनल का गठन प्रधानमंत्री मोदी द्वारा मुख्यमंत्रियों और उपराज्यपालों के साथ की गई उच्च स्तरीय बैठक के तुरंत बाद किया गया. इसका मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया संकट की निरंतर निगरानी करना और देश में व्यापारिक स्थिरता बनाए रखना है. सरकार का ध्यान विशेष रूप से आम भारतीयों के आर्थिक हितों और उनकी सुरक्षा पर है.
आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर
बैठक के दौरान रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि मंत्रियों ने ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े संभावित जोखिमों की गहराई से समीक्षा की है. इसके अलावा देश में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और बुनियादी ढांचे की मजबूती पर भी विस्तृत चर्चा हुई. सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का कोई भी नकारात्मक असर भारत की घरेलू आपूर्ति श्रृंखला पर न पड़े. समुद्र मार्ग को सुदृढ़ बनाना और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है.
'टीम इंडिया' का सामूहिक प्रयास
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस गंभीर संकट से निपटने के लिए 'टीम इंडिया' के सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर एक दिशा में काम करना होगा ताकि देश की आर्थिक स्थिरता को कोई नुकसान न पहुंचे. मोदी सरकार का मानना है कि राज्यों की सक्रिय भागीदारी के बिना इस वैश्विक संकट के स्थानीय प्रभावों को कम करना संभव नहीं होगा. इसलिए सभी प्रशासनिक इकाइयों को एकजुट होकर चुनौतियों का सामना करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं.
वैकल्पिक ऊर्जा और भविष्य की राह
संकट के दीर्घकालिक समाधान के रूप में प्रधानमंत्री ने राज्यों को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को तेजी से बढ़ावा देने की सलाह दी है. इसमें बायोफ्यूल, सौर ऊर्जा, गोबरधन पहल और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्र शामिल हैं. ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता ही आने वाले समय में ऐसे किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट से भारत को सुरक्षित रख सकती है. इन नवीन ऊर्जा विकल्पों पर ध्यान केंद्रित करने से न केवल पर्यावरण को लाभ होगा, बल्कि विदेशी संसाधनों पर हमारी रणनीतिक निर्भरता भी कम होगी.
भ्रामक सूचनाओं के खिलाफ कड़ी चेतावनी
बैठक में प्रधानमंत्री ने अफवाहों और गलत सूचनाओं के प्रसार को लेकर भी अधिकारियों को आगाह किया. उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि जनता तक केवल सटीक और आधिकारिक जानकारी ही पहुंचनी चाहिए. भ्रामक खबरों से बाजार में अनावश्यक अफरा-तफरी मच सकती है, जिसे रोकना अनिवार्य है. इसके साथ ही उन्होंने राज्यों को जमाखोरी और मुनाफाखोरी करने वालों के खिलाफ अत्यंत सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.
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