होर्मुज तनाव के बीच भारत पहुंचा 20 हजार टन LPG, ईरान-अमेरिका नाकेबंदी के बीच खास स्ट्रेटेजी से मिशन सफल
मिडिल ईस्ट तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते खतरे के बीच 20 हजार टन एलपीजी लेकर एक जहाज सुरक्षित भारत पहुंच गया. भारत सरकार के चार मंत्रालयों के समन्वय और एडवांस रणनीति से ऐसे सफल हुआ मिशन.
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत सरकार की अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के प्रयास लगातार जारी है. इसी क्रम में रविवार सुबह एक जहाज 20 हजार टन एलपीजी लेकर कांडला स्थित दीनदयाल उपाध्याय बंदरगाह पर पहुंच गया. इस जहाज को होर्मुज जलडमरूमध्य में गोलाबारी से बचाने के लिए भारत सरकार के चार मंत्रालयों ने दिन रात जुटकर जो रणनीति बनाई, पूरी तरह सफल रही और यह जहाज ईरान- अमेरिका की नाकेबंदी को पार करते हुए भारत पहुंच गया.
मिडिल ईस्ट तनाव के चलते ढाई माह से होर्मुज पर तनाव
बता दें कि मिडिल ईस्ट तनाव के चलते अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से सबसे अहम समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरू मध्य करीब ढाई माह से असुरक्षित बना हुआ है. मार्शल आईलैंड्स के ध्वज वाला जहाज “सिमी” भारत के लिए एलपीजी लेकर 13 मई को होर्मुज जलडमरूमध्य से पार कर गया था. यह जहाज इंडियन ऑयल कार्पोरेशन के द्वारा कतर के रास लफ्फान टर्मिनल से खरीदी गई 20 हजार टन एनपीजी लेकर भारत पहुंचा है.
भारत को एडवांस स्ट्रेटेजी का सहारा लेना पड़ा
अमेरिकी और ईरानी नाकेबंदी के बीच से होर्मुज से जहाज पार कराने के लिए भारत को “एडवांस स्ट्रेटेजी” का सहारा लेना पड़ा. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जहाज के द्वारा अपनाई गई खास स्ट्रेटेजिक टैक्नोलॉजी के चलते रडार उसे लॉकेट करने में कामयाब नहीं हो सके और जहाज रडार निगरानी वाले युद्ध क्षेत्र को सुरक्षित रूप से पार करने में कामयाब रहा.
इन चार मंत्रालयों के कोर्डिनेशन से मिली सफलता
बंदगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल के मुताबिक एलपीजी लेकर आ रहे जहाज को सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कराने के लिए डीजी शिपिंग, विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के बीच रहे राउंड द क्लॉक कोर्डिनेशन के बाद ही इस जहाज का सुरक्षित पहुंचना संभव हो पाया. होर्मुज में आवाजाही प्रभावित होने से अब तक भारत आने वाला यह 13वां जहाज है.
एनवी सनशाइन में आ रहा 46 हजार टन से अधिक ईंधन
बता दें कि “सिमी” के पीछे-पीछे वियतनाम के ध्वज वाला “एनवी सनशाइन” भी 46 हजार टन से अधिक ईंधन लेकर भारत के लिए रवाना हुआ है. एनवी शनशाइन (NV SunShine) न्यू मंगलौर बंदरगाह पर डॉक करेगा. दो खेपों में भारत पहुंच रही एनपीजी भारत के घरेलू बाजार के लिए काफी अहम साबित होने वाली है. बता दें कि तनाव के चलते जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से भारत के गैस भंडार में करीब 15 परसेंट की गिरावट आई है. कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केपलर का कहना है कि मिडिल ईस्ट तनाव से पहले भारत के पास 10.7 करोड़ बैरल कच्चे तेल का भंडार था, वर्तमान में यह भंडार 9.1 करोड़ बैरल है.