'अपनी नाकामियों को छुपाने की कोशिश' , सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान की युद्ध धमकी पर भारत ने दिया करारा जवाब

सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के युद्ध संबंधी बयान पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. विदेश मंत्रालय ने आरोपों को निराधार बताते हुए पाकिस्तान पर अपने मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया.

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Sagar Bhardwaj

भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ द्वारा जल सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए युद्ध की चेतावनी दिए जाने के बाद भारत ने सख्त प्रतिक्रिया व्यक्त की है. नई दिल्ली ने इन टिप्पणियों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि पाकिस्तान ऐसे बयानों के जरिए अपनी आंतरिक समस्याओं और मानवाधिकार से जुड़े सवालों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है. 

पाकिस्तान के बयान पर भारत की तीखी प्रतिक्रिया

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने वीकली प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के बयान को खारिज करते हुए कहा कि ऐसे दावे वास्तविक तथ्यों से परे हैं. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से लगाए जा रहे आरोप उसकी अपनी कमियों को छिपाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठ रहे सवालों से ध्यान भटकाने का प्रयास हैं. भारत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इन दावों का कोई आधार नहीं है और उन्हें पूरी तरह अस्वीकार किया जाता है. विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब दोनों देशों के बीच सिंधु जल संधि को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है.


पीओके और मानवाधिकार मुद्दों का भी किया जिक्र

भारत ने अपनी प्रतिक्रिया में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की स्थिति का भी उल्लेख किया. विदेश मंत्रालय के अनुसार वहां की परिस्थितियां लंबे समय से अपनाई गई नीतियों का परिणाम हैं. प्रवक्ता ने कहा कि नागरिकों को आवश्यक सुविधाओं से वंचित किए जाने, इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध और कठोर प्रशासनिक उपायों जैसी घटनाएं गंभीर चिंता का विषय रही हैं. उन्होंने यह भी कहा कि कई लोगों की जान जाने की खबरें सामने आई हैं. भारत ने उम्मीद जताई कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इन मामलों को गंभीरता से देखेगा और पाकिस्तान की जवाबदेही तय करने की दिशा में उचित कदम उठाएगा.

ख्वाजा आसिफ ने क्या कहा

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में एक टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा था कि यदि पाकिस्तान की जल सुरक्षा को खतरा महसूस हुआ तो उनका देश भारत के खिलाफ युद्ध का रास्ता भी अपना सकता है. उन्होंने दावा किया कि यदि भारत जल प्रवाह को प्रभावित करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाता दिखाई देता है, तो पाकिस्तान सैन्य विकल्पों पर विचार कर सकता है. 

क्या है सिंधु जल संधि का महत्व

सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच जल बंटवारे की एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है, जिसे विश्व बैंक की मध्यस्थता में लागू किया गया था. इस समझौते के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह प्रमुख नदियों के जल उपयोग को लेकर दोनों देशों के अधिकार तय किए गए हैं. पश्चिमी नदियों- सिंधु, झेलम और चिनाब- का अधिकांश जल उपयोग पाकिस्तान को मिलता है, जबकि पूर्वी नदियों- रावी, ब्यास और सतलुज- का उपयोग भारत के हिस्से में आता है. भारत को पश्चिमी नदियों के जल का सीमित कृषि, घरेलू और जलविद्युत परियोजनाओं के लिए उपयोग करने की अनुमति भी प्राप्त है. यही संधि दोनों देशों के बीच जल सहयोग की आधारशिला मानी जाती है.