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भारत ने पाक एयरबेसों पर 15 ब्रह्मोस मिसाइलें दागीं, राडार-एयर डिफेंस सिस्टम हो गए थे ठप

भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तानी रडार और वायु रक्षा प्रणालियों को जाम करने के लिए पायलट रहित लक्ष्य विमानों का इस्तेमाल किया. एक बार जब वे सक्रिय हो गए, तो भारत ने उन प्रणालियों को निष्क्रिय करने और उन्हें नुकसान पहुंचाने के लिए हारोप कामिकेज़ ड्रोन तैनात किए.

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Gyanendra Sharma

भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ जवाबी हमले में 9-10 मई की रात को लगभग 15 ब्रह्मोस मिसाइलों और अन्य सटीक हथियारों को का इस्तेमाल किया. ब्रह्मोस मिसाइलों ने पाकिस्तान के एयरबेस को टारगेट किया. भारतीय वायु सेना (IAF) द्वारा किए गए इस ऑपरेशन में पाकिस्तान के 13 प्रमुख एयरबेस में से 11 को नुकसान पहुंचा, जिससे देश के वायु रक्षा नेटवर्क और सैन्य बुनियादी ढांचे को बड़ा झटका लगा.

ये हमले पाकिस्तान द्वारा 7-8 मई की रात को ड्रोन और मिसाइलों का उपयोग करके उत्तरी और पश्चिमी भारत में कई सैन्य ठिकानों पर हमला करने के प्रयास के बाद किए गए. लक्षित क्षेत्रों में श्रीनगर, जम्मू, पठानकोट, अमृतसर, लुधियाना और भुज शामिल थे. हालांकि, भारत की वायु रक्षा प्रणालियों ने सभी खतरों का सफलतापूर्वक पता लगाया और उन्हें बेअसर कर दिया. जवाब में, भारतीय सशस्त्र बलों ने अगली सुबह समन्वित हमले शुरू किए , जिसमें लाहौर में एक सहित पाकिस्तानी वायु रक्षा रडार को निशाना बनाया गया. 9-10 मई की रात को भारतीय वायुसेना ने  पाकिस्तानी वायु सेना के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया. 

पाकिस्तानी रडार और वायु रक्षा प्रणालियों को किया तबाह

सूत्रों के अनुसार, भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तानी रडार और वायु रक्षा प्रणालियों को जाम करने के लिए पायलट रहित लक्ष्य विमानों का इस्तेमाल किया. एक बार जब वे सक्रिय हो गए, तो भारत ने उन प्रणालियों को निष्क्रिय करने और उन्हें नुकसान पहुंचाने के लिए हारोप कामिकेज़ ड्रोन तैनात किए. इस कदम ने ब्रह्मोस और स्कैल्प क्रूज मिसाइलों का उपयोग करके आगे के मिसाइल हमलों का मार्ग प्रशस्त किया. इन मिसाइलों को ले जाने वाले विमानों ने भारत के पश्चिमी और दक्षिण पश्चिमी वायु कमान के अंतर्गत विभिन्न ठिकानों से उड़ान भरी. हमलों में सिंध में एक हैंगर सहित महत्वपूर्ण स्थानों को निशाना बनाया गया, जहां पाकिस्तान ने कथित तौर पर यूएवी और एक हवाई निगरानी विमान सहित महत्वपूर्ण उपकरण खो दिए.

हमलों के बाद, भारी क्षति के कारण पाकिस्तानी वायुसेना को अपने विमानों को पीछे के ठिकानों पर ले जाने के लिए बाध्य होना पड़ा. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की देखरेख में हुए इस ऑपरेशन में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की सलाह पर ब्रह्मोस मिसाइल को प्राथमिक हथियार के रूप में चुना गया. ब्रह्मोस के इस्तेमाल को भारत की सैन्य क्षमताओं के एक मजबूत संकेत के रूप में देखा गया.

ब्रह्मोस मिसाइल

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में लखनऊ में ब्रह्मोस एयरोस्पेस सुविधा के उद्घाटन के दौरान इन हमलों में मिसाइल के इस्तेमाल की पुष्टि की. उन्होंने कहा,  अगर आपने ब्रह्मोस को कार्रवाई में नहीं देखा है, तो पाकिस्तान के लोगों से पूछिए. ब्रह्मोस एक लंबी दूरी की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है जिसे भारत और रूस ने संयुक्त रूप से विकसित किया है. अपनी गति और सटीकता के लिए जानी जाने वाली यह मिसाइल 'फायर एंड फॉरगेट' सिद्धांत पर काम करती है. यह मैक 3 के करीब की गति तक पहुँच सकती है और 290 किलोमीटर दूर तक के लक्ष्यों पर उच्च सटीकता के साथ हमला कर सकती है.