'EU से डील के बाद होगा 6.4 लाख करोड़ का निर्यात', पीयूष गोयल ने FTA को बताया भारत के लिए बड़ी कामयाबी
भारत और यूरोपीय संघ ने लंबे इंतजार के बाद फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अंतिम रूप दे दिया है. यह समझौता व्यापार, निवेश, रोजगार और सप्लाई चेन को मजबूती देगा और वैश्विक अनिश्चितता के दौर में नई दिशा तय करेगा.
नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ के बीच मंगलवार को ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर सहमति बन गई. दो दशक से अधिक समय तक चले संवाद और 2022 में दोबारा शुरू हुई वार्ताओं के बाद यह समझौता 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन में घोषित किया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन ने इसे नियम आधारित वैश्विक व्यापार के लिए मजबूत संकेत बताया. यह समझौता ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार अस्थिर दौर से गुजर रहा है.
भारत-ईयू एफटीए ऐसे दौर में हुआ है जब दुनिया टैरिफ युद्ध, सप्लाई चेन संकट और रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रभाव झेल रही है. यह समझौता दोनों पक्षों को विविध और भरोसेमंद व्यापार साझेदारी की ओर ले जाता है. भारत और यूरोपीय संघ मिलकर वैश्विक जीडीपी का लगभग 25 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार का एक तिहाई हिस्सा रखते हैं. ऐसे में यह करार अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संतुलन में अहम भूमिका निभाएगा.
राज्यों और निर्यातकों को बड़ा लाभ
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, इस समझौते से 27 यूरोपीय बाजारों में भारत के करीब 6.4 लाख करोड़ रुपये के निर्यात को फायदा मिलेगा. गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम और केरल जैसे राज्यों को खास लाभ मिलने की उम्मीद है. इन राज्यों की ताकत मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और निर्यात आधारित उद्योगों में है.
श्रम प्रधान उद्योगों को नई गति
एफटीए से वस्त्र, परिधान, चमड़ा, जूते, रत्न और आभूषण जैसे श्रम प्रधान क्षेत्रों को सीधा फायदा होगा. वस्त्र और परिधान पर शून्य शुल्क से भारतीय उत्पाद 263 अरब डॉलर के यूरोपीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनेंगे. चमड़ा और फुटवियर पर 17 प्रतिशत तक के शुल्क हटने से आगरा, कानपुर और कोल्हापुर जैसे क्लस्टरों को नई जान मिलेगी. रत्न और आभूषण उद्योग को भी बड़ा बाजार मिलेगा.
एमएसएमई और रोजगार के अवसर
यह समझौता माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज के लिए यूरोपीय बाजार के दरवाजे खोलता है. भारतीय कंपनियां वैश्विक वैल्यू चेन से जुड़ सकेंगी. इससे महिलाओं, कारीगरों, युवाओं और पेशेवरों के लिए रोजगार के नए अवसर बनेंगे. इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को 2 ट्रिलियन डॉलर के ईयू औद्योगिक बाजार में प्राथमिक पहुंच मिलने की संभावना है.
सेवाएं, मोबिलिटी और भविष्य की तैयारी
एफटीए केवल वस्तुओं तक सीमित नहीं है. आईटी, प्रोफेशनल सेवाएं, शिक्षा, पर्यटन और वित्तीय सेवाओं में भी बाजार पहुंच बढ़ेगी. कुशल और अर्धकुशल भारतीय पेशेवरों की आवाजाही आसान होगी. छात्रों के लिए भी बेहतर अवसर खुलेंगे. इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीन टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा. यह समझौता विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को मजबूती देता है.