हिमाचल के जंगलों में भड़की भीषण आग, भारतीय वायुसेना ने संभाली कमान; वन्यजीवों पर मंडरा रहा खतरा
हिमाचल प्रदेश के सोलन और कसौली के जंगलों में भीषण गर्मी के कारण भयंकर आग लग गई है. अगलगी की इस भयावह घटना से निपटने और वन्यजीवों को बचाने के लिए भारतीय वायु सेना के एमआई-17 और चिनूक हेलीकॉप्टर की तैनाती की गई है.
नई दिल्ली: पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश इस समय भीषण गर्मी और जंगलों की आग से जूझ रहा है. सोलन और कसौली के हरे-भरे जंगलों में भड़की आग अब तेजी से रिहायशी इलाकों और फलों के बागों की तरफ बढ़ रही है. इस प्राकृतिक आपदा ने न केवल वनस्पतियों को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि बेजुबान वन्यजीवों के अस्तित्व पर भी बड़ा संकट खड़ा हो गया है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है.
भीषण गर्मी और सूखे मौसम के कारण कसौली की पहाड़ियाँ आग की लपटों से घिर गई हैं. सूखी पत्तियों और तेज हवाओं ने आग को भड़काने में घी का काम किया है. देखते ही देखते यह आग स्थानीय किसानों के फलों के बागों तक पहुँच गई, जिससे भारी नुकसान की आशंका है. घने जंगलों में लगी इस आग के कारण स्थानीय वन्यजीव अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे हैं.
वायु सेना ने संभाली कमान
जमीन पर तैनात दमकल कर्मियों के लिए दुर्गम पहाड़ी रास्तों के कारण आग पर काबू पाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो रहा था. संकट को बढ़ता देख मंगलवार को भारतीय वायु सेना को इस अभियान में शामिल किया गया. वायु सेना ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अपने दो अत्याधुनिक हेलीकॉप्टरों को प्रभावित इलाकों में रवाना किया. इन विमानों की मदद से उन संकरे और ऊँचे क्षेत्रों को निशाना बनाया जा रहा है, जहाँ पैदल पहुँचना असंभव है.
सुखना झील से मिला सहारा
इस बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन में वायु सेना के एमआई-17 और चिनूक हेलीकॉप्टरों को सेवा में लगाया गया है. ये शक्तिशाली हेलीकॉप्टर चंडीगढ़ की प्रसिद्ध सुखना झील से लगातार पानी भर रहे हैं. झील से पानी लाकर प्रभावित वन क्षेत्रों के ऊपर आसमान से बौछार की जा रही है. इस हवाई रणनीति का मुख्य उद्देश्य आग की लपटों को आगे बढ़ने से रोकना और संवेदनशील इलाकों को सुरक्षित करना है.
सोलन और कसौली की इस त्रासदी से निपटने के लिए प्रशासन पूरी ताकत झोंक रहा है. जमीन पर मौजूद वन विभाग की टीमें और आसमान में उड़ते हेलीकॉप्टर एक बेहतरीन तालमेल के साथ काम कर रहे हैं. दोनों मोर्चों से किए जा रहे इस संयुक्त प्रयास का असर अब दिखने लगा है. अधिकारी इस बात की पूरी कोशिश कर रहे हैं कि आग को नए रिहायशी इलाकों में फैलने से तुरंत रोका जा सके.
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
प्रभावित इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों और पर्यटकों की सुरक्षा सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता बनी हुई है. आपदा प्रबंधन की टीमें लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं ताकि किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान को टाला जा सके. आने वाले कुछ घंटे इस अभियान के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. हर प्रभावित कोने तक मदद पहुँचाने की कोशिशें जारी हैं.