Haryana Election 2024: पहलवानों का विरोध, अब बजरंग और विनेश कांग्रेस में शामिल; क्या BJP को हरियाणा में होगा नुकसान?

Haryana Election 2024: हरियाणा में पहलवानों का विरोध प्रदर्शन झेल रही भाजपा पर बजरंज और विनेश के कांग्रेस में शामिल होने से क्या और कितना असर पड़ेगा? इस सवाल का जवाब तो चुनाव नतीजों के बाद ही मिल पाएगा, लेकिन भाजपा बिलकुल भी पहलवानों पर चुनाव प्रचार के दौरान हमला करने के मूड में नहीं दिख रही है. पार्टी की ओर से कहा गया है कि कांग्रेस ने उन्हें फंसाया.

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Haryana Election 2024: पहलवान विनेश फोगट और बजरंग पुनिया के कांग्रेस में शामिल होने के मामले में भाजपा सावधानी से कदम उठा रही है. राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, भाजपा को पता है कि हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान दोनों पहलवानों की किसी भी तरह की आलोचना पार्टी के लिए महंगी साबित हो सकती है.

शुक्रवार को, भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उसने फोगट और पुनिया को 'फंसाया' है, जो भाजपा नेता और भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर विरोध प्रदर्शन में सबसे आगे थे. कुछ भाजपा नेताओं ने कहा कि ये उनके विश्वास का सबूत है कि विरोध प्रदर्शन को कांग्रेस का समर्थन प्राप्त था.

देश की बेटी से कांग्रेस की बेटी बनना चाहती हैं, तो हमें क्या ऐतराज है: अनिल विज

फोगट के बारे में बात करते हुए हरियाणा के पूर्व गृह मंत्री और भाजपा के सीनियर नेता अनिल विज ने मीडियाकर्मियों से कहा कि अगर वे देश की बेटी से कांग्रेस की बेटी बनाना चाहती है, तो हमें क्या ऐतराज है? लेकिन, विज ने कहा कि ये इस बात का सबूत है कि यह उनके (कांग्रेस के) उकसावे की वजह से ही (बृजभूषण के खिलाफ) विरोध प्रदर्शन हो रहा है. उन्होंने कहा कि अन्यथा यह मामला बहुत पहले ही सुलझ गया होता. कांग्रेस पहले दिन से ही इन खिलाड़ियों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही थी.

एक अन्य भाजपा नेता ने कहा कि चूंकि आंदोलन पहले ही राजनीतिक मोड़ ले चुका है, इसलिए पहलवानों के फैसले में कोई आश्चर्य की बात नहीं है. हरियाणा भाजपा अध्यक्ष मोहन लाल बडोली ने हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में दावा किया कि कांग्रेस ने पहलवानों को अपनी राजनीति के लिए इस्तेमाल किया है. उनके विरोध से ताकत हासिल की है लेकिन बदले में उन्हें सशक्त नहीं बनाया है.

खट्टर बोले- विरोध प्रदर्शन के दौरान एथलीट राजनीतिक चक्रव्यूह में फंस गए थे

पहलवानों के विरोध प्रदर्शन को कांग्रेस से जोड़ने वाला सबसे मजबूत बयान मनोहर लाल खट्टर की ओर से आया था. विरोध प्रदर्शन के शुरुआत के दौरान खट्टर मुख्यमंत्री थे, अब वे केंद्रीय मंत्री हैं. हाल ही में, जब विनेश और बजरंज ने नई दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की, तब खट्टर ने कहा था कि विरोध प्रदर्शन के दौरान एथलीट राजनीतिक चक्रव्यूह में फंस गए थे.

उन्होंने कहा था कि जो कुछ तब शुरू हुआ था, वह अब चरम पर पहुंच रहा है. पहलवानों का विरोध राजनीति से प्रेरित था. ये लोग (पहलवान) कांग्रेस से टिकट मांग रहे हैं. इसका मतलब है कि कोई सांठगांठ है. अगर तब यह स्पष्ट नहीं था, तो अब यह पूरी तरह स्पष्ट है.

बृजभूषण बोले- मैं तो पहले दिन से ही ये बोल रहा था

इस मुद्दे पर ज़्यादा बात करने से इनकार करते हुए बृजभूषण ने पत्रकारों से कहा कि विरोध प्रदर्शन के समय उन्होंने जो कहा था, वह सच हो रहा है. पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के गोंडा में एक निजी स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेते हुए उन्होंने कहा कि हरियाणा के वरिष्ठ कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा और भूपेंद्र सिंह हुड्डा मेरे खिलाफ़ साजिश रच रहे हैं. मैंने पहले दिन जो कुछ भी कहा था, मैं उस पर कायम हूं और आज, वही बात पूरे देश में कही जा रही है.

क्या बजरंग और विनेश के कांग्रेस में जाने से भाजपा को नुकसान होगा?

हरियाणा के एक भाजपा नेता ने कहा कि फिर भी, उन्हें नहीं लगता कि फोगट के कांग्रेस में शामिल होने से उन्हें कोई गंभीर नुकसान पहुंचेगा, क्योंकि कृषि आंदोलन और पहलवानों के विरोध के कारण राज्य में पार्टी को पहले ही नुकसान हो चुका है.

दरअसल, नेता ने कहा कि फोगाट के राजनीति में उतरने के फैसले को लोग शायद पसंद न करें, जबकि उन्हें ओलंपिक पदक से वंचित किए जाने के बाद राष्ट्रीय नायक के रूप में सम्मानित किया गया था. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे लोग भाजपा को वोट देंगे, नेता ने स्वीकार किया.

पंचकूला से भाजपा विधायक और विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने पहलवानों के कांग्रेस में शामिल होने या चुनाव लड़ने के फैसले को उनकी निजी पसंद बताया. विनेश फोगट ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है. बजरंग पुनिया भी एक प्रसिद्ध पहलवान रहे हैं. लेकिन खेल और राजनीति अलग-अलग चीजें हैं...दांव-पेंच अलग-अलग हैं. साथ ही मेरा मानना ​​है कि वे राजनीति में भी कुछ अच्छा लाएंगे.

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान बजरंज और विनेश के फैसले पर दुख जताने वालों में साक्षी मलिक भी थीं. वे फोगट और पुनिया के साथ पहलवानों के विरोध का तीसरा चेहरा थीं. कांग्रेस में शामिल होने के अपने फैसले को 'उनकी व्यक्तिगत पसंद' बताते हुए मलिक ने कहा कि मेरा मानना ​​है कि हमें बलिदान देना चाहिए. हमारे आंदोलन, महिलाओं की लड़ाई को गलत नाम नहीं मिलना चाहिए. मेरी तरफ से, आंदोलन जारी है. मुझे भी प्रस्ताव मिले थे, लेकिन मैं जो शुरू किया था उसे अंत तक ले जाना चाहती थी. जब तक (कुश्ती) संघ साफ नहीं हो जाता और महिलाओं का शोषण बंद नहीं हो जाता, मेरी लड़ाई जारी रहेगी.