सरकार ने टेलीग्राम को बताया 'नया डार्क वेब', कहा- चाइल्ड पॉर्न फैलाने और साइबर अटैक के लिए हो रहा इसका इस्तेमाल

केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में दायर हलफनामे में टेलीग्राम पर गंभीर आरोप लगाए हैं. सरकार का कहना है कि यह मंच साइबर अपराध, आतंकवादी प्रचार, वित्तीय धोखाधड़ी, डेटा चोरी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के लिए तेजी से इस्तेमाल किया जा रहा है.

@JaikyYadav16
Sagar Bhardwaj

मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है. केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में दायर अपने हलफनामे में दावा किया है कि यह ऐप अब अपराधियों, साइबर ठगों और कट्टरपंथी संगठनों के लिए एक प्रमुख माध्यम बनता जा रहा है. सरकार के अनुसार, प्लेटफॉर्म की गोपनीयता संबंधी सुविधाएं जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती पैदा कर रही हैं. इसी वजह से कई तरह की अवैध गतिविधियों को अंजाम देने वाले लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं और अपनी पहचान छिपाने में सफल हो रहे हैं.

 टेलीग्राम को बताया गया ‘नया डार्क वेब’

केंद्र सरकार ने अदालत में कहा कि टेलीग्राम अब केवल एक सामान्य मैसेजिंग ऐप नहीं रह गया है. सरकार का आरोप है कि यह प्लेटफॉर्म ऐसे लोगों को जोड़ने का माध्यम बन रहा है जो कानून से बचकर गतिविधियां संचालित करना चाहते हैं. हलफनामे में कहा गया है कि अपराधी टेलीग्राम चैनलों और समूहों के जरिए ऐसे लिंक साझा करते हैं जो उन्हें गहरे इंटरनेट नेटवर्क तक पहुंचाते हैं. इससे जांच एजेंसियों के लिए अपराधियों की पहचान करना और उनके नेटवर्क तक पहुंचना काफी कठिन हो जाता है. सरकार का मानना है कि प्लेटफॉर्म की संरचना और गोपनीयता विकल्प इस समस्या को और गंभीर बना रहे हैं.

साइबर ठगी और वित्तीय अपराधों पर चिंता

सरकार ने दावा किया है कि टेलीग्राम का उपयोग साइबर अपराधों में तेजी से बढ़ा है. फर्जी पहचान के जरिए बनाए गए अकाउंट्स का इस्तेमाल वित्तीय धोखाधड़ी, डेटा लीक और ऑनलाइन ठगी जैसी घटनाओं में किया जा रहा है. राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का हवाला देते हुए सरकार ने कहा कि ऐसे मामलों में लगातार वृद्धि देखी गई है. इसके अलावा, कथित तौर पर कुछ चैनलों का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े लेन-देन और साइबर अपराध से प्राप्त धन के हस्तांतरण के लिए भी किया जा रहा है. इससे डिजिटल सुरक्षा और वित्तीय व्यवस्था दोनों पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है.


 आतंकवादी प्रचार और संवेदनशील सामग्री का मुद्दा

हलफनामे में यह भी कहा गया है कि कुछ टेलीग्राम चैनल और समूह हिंसक चरमपंथी विचारधाराओं तथा आतंकवादी संगठनों से जुड़े प्रचार को फैलाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं. सरकार के अनुसार, ऐसे माध्यमों से भ्रामक सूचनाएं फैलाकर सामाजिक शांति और सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है. इसके साथ ही बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार को भी गंभीर चिंता का विषय बताया गया है. जांच एजेंसियों का कहना है कि इस तरह की सामग्री की निगरानी और रोकथाम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है.

 डेटा सुरक्षा और कॉपीराइट उल्लंघन के आरोप

सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ टेलीग्राम बॉट्स के जरिए नागरिकों की निजी जानकारी तक पहुंच आसान बनाई जा रही है. इनमें मोबाइल नंबर, आधार से जुड़ी जानकारियां और पहले से लीक हो चुके डेटाबेस से प्राप्त संवेदनशील सूचनाएं शामिल हो सकती हैं. इसके अलावा, टेलीग्राम चैनलों पर फिल्मों, वेब सीरीज और अन्य कॉपीराइट सामग्री के अवैध प्रसार को लेकर भी चिंता जताई गई है. सरकार का कहना है कि इससे कंटेंट निर्माताओं को आर्थिक नुकसान पहुंचता है. फिलहाल यह पूरा मामला दिल्ली हाईकोर्ट के सामने है, जहां सरकार ने प्लेटफॉर्म से जुड़े संभावित जोखिमों और अपने आकलन को विस्तार से रखा है.