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दिल्ली का ड्राइवर बना देश का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर, आईएसआई और डी कंपनी से निकला कनेक्शन

दिल्ली का एक साधारण ड्राइवर सलीम अहमद उर्फ सलीम पिस्टल कैसे पाकिस्तान की आईएसआई और दाऊद इब्राहिम की डी कंपनी का सबसे भरोसेमंद हथियार सप्लायर बन गया, यह कहानी जितनी चौंकाने वाली है उतनी ही खतरनाक भी है. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की जांच में खुलासा हुआ है कि उसका नेटवर्क पाकिस्तान, नेपाल, दुबई और चीन तक फैला था.

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Kuldeep Sharma

सलीम पिस्टल का जीवन एक ऐसी दास्तान है जिसमें एक आम इंसान का चेहरा और उसके पीछे छुपा खतरनाक अपराधी दोनों नजर आते हैं. सातवीं तक पढ़ाई करने वाला और पेशे से ड्राइवर दिखने में भले साधारण लगे, लेकिन उसका काम भारत में हथियारों की सबसे बड़ी सप्लाई चैन खड़ी करना था. यह चैन न सिर्फ देश के गैंगस्टरों और बाहुबलियों तक हथियार पहुंचाती थी, बल्कि इसके धागे सीधे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम तक जुड़े थे.

शुरुआत में सलीम ने हथियारों को कार और ट्रक के टायरों में छिपाकर भारत लाना शुरू किया. पाकिस्तान से भारत आने वाली समझौता एक्सप्रेस ट्रेन भी उसके धंधे का हिस्सा बन गई. इस ट्रेन के जरिए पिस्तौल और रायफल जैसी हथियारों की खेप दिल्ली तक पहुंचाई जाती थी. जब सुरक्षा एजेंसियों की नजर इस रूट पर पड़ी तो उसने नेपाल का रास्ता निकाला. वहां से ट्रांसफॉर्मर के पुर्जों और कार के स्पेयर पार्ट्स में छिपाकर हथियार भारत भेजे जाने लगे. काठमांडू एयरपोर्ट पर उसकी इतनी मजबूत पकड़ थी कि उसके कंसाइनमेंट बिना चेकिंग के निकल जाते थे.

गैंगस्टरों और बाहुबलियों का सबसे बड़ा सप्लायर

दिल्ली पुलिस के अनुसार सलीम का क्लाइंट लिस्ट बेहद खतरनाक था. लॉरेंस बिश्नोई, हाशिम बाबा जैसे नामचीन गैंगस्टर उससे हथियार मंगाते थे. उत्तर प्रदेश के कुछ बाहुबली भी उसके जरिए पाकिस्तान से आने वाले हथियार खरीदते रहे. खुलासा हुआ कि उसने एक बाहुबली को एम-5 रायफल सप्लाई की थी. यह हथियार इतना खतरनाक है कि बुलेटप्रूफ गाड़ियों तक को चीर सकता है.

आईएसआई और डी कंपनी से सीधे रिश्ते

स्पेशल सेल की रिपोर्ट साफ कहती है कि सलीम सिर्फ गैंगस्टरों का सप्लायर नहीं था, बल्कि आतंक और अंडरवर्ल्ड के बीच की अहम कड़ी था. पाकिस्तान की आईएसआई उसे अपना बड़ा एसेट मानती थी और उसका नेटवर्क सीधे दाऊद इब्राहिम की डी कंपनी से जुड़ा था. कई सालों तक उसने पाकिस्तान, नेपाल, दुबई और थाईलैंड में रहकर नए नाम और पहचान से अपना धंधा चलाया.

दिल्ली से कराची तक का सफर और एजेंसियों की पकड़

सलीम का जन्म और परवरिश दिल्ली के जाफराबाद इलाके में हुई. उसके पिता मजदूरी करते थे और वह खुद ड्राइवर बना. 2010 में वह पहली बार कराची गया जहां उसका भतीजा पहले से हथियारों के धंधे में शामिल था. यहीं से उसने तस्करी की तकनीक सीखी और लौटकर अपने नेटवर्क को इतना फैला दिया कि वह भारत का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर बन गया. अब दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही हैं. माना जा रहा है कि उसके पास ऐसे राज छिपे हैं जो भारत, नेपाल और पाकिस्तान के पूरे हथियार तस्करी नेटवर्क की परतें खोल सकते हैं.