दिल्ली, यूपी से लेकर बिहार तक...जानें श्रमिकों को कहां कितनी मिलती है न्यूनतम मजदूरी
दिल्ली, यूपी और बिहार में न्यूनतम मजदूरी के बीच बड़ा अंतर सामने आया है. बेहतर कमाई के लिए मजदूर पलायन कर रहे हैं, लेकिन बढ़ती महंगाई और खर्च उनकी मुश्किलों को और बढ़ा रहे हैं.
महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच देश के लाखों श्रमिक अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. दिल्ली-एनसीआर के औद्योगिक इलाकों में काम करने वाले प्रवासी मजदूर इन दिनों बेहतर वेतन की मांग को लेकर आवाज उठा रहे हैं. उनका कहना है कि बढ़ते किराए और खाने-पीने के खर्च के बाद बचत नाममात्र रह जाती है. ऐसे में अलग-अलग राज्यों में तय न्यूनतम मजदूरी की दरें अब एक बड़ा मुद्दा बन गई हैं, जो श्रमिकों के जीवन स्तर को सीधे प्रभावित करती हैं.
दिल्ली में सबसे ऊंची मजदूरी
देश की राजधानी दिल्ली में न्यूनतम मजदूरी सबसे अधिक मानी जाती है, जो यहां काम करने वाले श्रमिकों को कुछ राहत देती है. अकुशल श्रमिकों को करीब 19,846 रुपये प्रति माह, अर्द्ध-कुशल को 21,813 रुपये और कुशल श्रमिकों को 23,905 रुपये तक मिलते हैं. वहीं, ग्रेजुएट स्तर के क्लर्क या सुपरवाइजर को न्यूनतम 25,876 रुपये मिलना अनिवार्य है. इन आंकड़ों से साफ है कि दिल्ली में मजदूरी का स्तर बाकी राज्यों से काफी बेहतर है, जिससे यहां काम करने के लिए लोगों का आकर्षण बढ़ता है.
उत्तर प्रदेश में कम दरों की चुनौती
उत्तर प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी की दरों में समय-समय पर सुधार जरूर हुआ है, लेकिन यह अभी भी दिल्ली के मुकाबले काफी कम है. यहां अकुशल श्रमिकों को लगभग 11,313 रुपये प्रति माह मिलते हैं, जबकि अर्द्ध-कुशल को 12,120 रुपये और कुशल श्रमिकों को करीब 13,940 रुपये तक भुगतान किया जाता है. इतनी कम आय में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो जाता है, जिससे कई श्रमिक बेहतर अवसरों की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करते हैं.
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बिहार में नई दरों का असर
बिहार में 1 अप्रैल 2026 से नई न्यूनतम मजदूरी दरें लागू की गई हैं, जिनमें वेरिएबल डियरनेस अलाउंस (VDA) भी जोड़ा गया है. इसके तहत अकुशल श्रमिकों को 13,080 रुपये, अर्द्ध-कुशल को 13,560 रुपये और कुशल श्रमिकों को 16,530 रुपये प्रति माह मिलते हैं. वहीं, अति-कुशल श्रमिकों के लिए यह राशि 20,160 रुपये तय की गई है. हालांकि इन नई दरों से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन यह अभी भी दिल्ली के स्तर से काफी पीछे है.
पलायन और महंगाई का दबाव
इन आंकड़ों को देखें तो साफ है कि मजदूरी के मामले में राज्यों के बीच बड़ा अंतर है. यही वजह है कि यूपी और बिहार से बड़ी संख्या में लोग दिल्ली-एनसीआर की ओर पलायन करते हैं. लेकिन यहां रहने की लागत भी काफी ज्यादा है, जिससे उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा खर्च में ही चला जाता है. ऐसे में श्रमिकों के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ कम मजदूरी और दूसरी तरफ बढ़ती महंगाई. यह स्थिति नीति निर्माताओं के लिए भी गंभीर सोच का विषय बनती जा रही है.