अपने जंगी जहाज खुद तैयार करेगा भारत, पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू जेट को मिली मंजूरी, प्राइवेट-पब्लिक पार्टनरशिप को बढ़ावा

रक्षा मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, "कार्यक्रम के त्वरित क्रियान्वयन के लिए नोडल सार्वजनिक उपक्रम, एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए), जल्द ही रक्षा कंपनियों से दोहरे इंजन वाले पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू जेट का प्रोटोटाइप विकसित करने के लिए रुचि पत्र आमंत्रित करेगी.

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Garima Singh

5th generation fighter jet: ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के खिलाफ सफल सैन्य कार्रवाई के कुछ सप्ताह बाद, भारत ने मंगलवार को अपने सबसे उन्नत स्टील्थ लड़ाकू जेट के निर्माण के लिए एक ऐतिहासिक ढांचे को मंजूरी दे दी. यह कदम भारतीय वायु सेना की क्षमताओं को अभूतपूर्व ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है. 

रक्षा मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, "कार्यक्रम के त्वरित क्रियान्वयन के लिए नोडल सार्वजनिक उपक्रम, एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए), जल्द ही रक्षा कंपनियों से दोहरे इंजन वाले पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू जेट का प्रोटोटाइप विकसित करने के लिए रुचि पत्र (ईओआई) आमंत्रित करेगी.' इस परियोजना को गति देने के लिए निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रों की कंपनियों को बोली लगाने का अवसर दिया जाएगा. 

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए किसी घरेलू कंपनी के साथ साझेदारी करेगी. कंपनियां स्वतंत्र रूप से या संयुक्त उद्यम के तौर पर अपनी बोलियां लगा सकतीं हैं. यह कदम न केवल रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देगा, बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर रक्षा उत्पादन में अग्रणी बनाने में भी मदद करेगा. 

निजी क्षेत्र की भागीदारी: रक्षा उत्पादन में नया दौर

मार्च 2025 में, केंद्र सरकार ने 'हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड' (एचएएल) पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने की सिफारिश की थी. HAL की 4.5 पीढ़ी के हल्के लड़ाकू विमान तेजस की धीमी डिलीवरी के लिए पहले भी आलोचना हो चुकी है. कंपनी ने इस देरी का कारण जनरल इलेक्ट्रिक से इंजन की आपूर्ति में देरी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की समस्याओं को बताया. 

भारतीय वायु सेना की रणनीतिक जरूरत

पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू जेट कार्यक्रम भारतीय वायु सेना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसके स्क्वाड्रन की संख्या स्वीकृत 42 से घटकर 31 रह गई है. प्रत्येक स्क्वाड्रन में सामान्यतः 16-18 विमान होते है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वायु सेना ने आतंकवादी ठिकानों और सैन्य प्रतिष्ठानों को नष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. रॉयटर्स के अनुसार, "जब चीन अपनी वायु शक्ति का तेजी से विस्तार कर रहा है, तो भारतीय वायु सेना की ताकत को सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है.' पाकिस्तान के पास चीन का उन्नत जे-10 लड़ाकू विमान है, जबकि वैश्विक स्तर पर अमेरिका के एफ-22 और एफ-35, रूस का सुखोई एसयू-57, और चीन का जे-35 जैसे पांचवीं पीढ़ी के विमान पहले से ही तैनात हैं. 

वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति

यह नया कार्यक्रम भारत को वैश्विक रक्षा क्षेत्र में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ जेट की विशेषताएं, जैसे उन्नत रडार चोरी प्रणाली, सुपरसोनिक गति, और अत्याधुनिक हथियार प्रणाली, भारतीय वायु सेना को क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाएंगी।