SIR पर मतभेद की खबरों को चुनाव आयोग ने किया खारिज, कहा- 'सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए'
SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की मीडिया रिपोर्ट के बाद आयोग के सूत्रों ने सफाई दी है. आयोग का कहना है कि SIR समेत सभी फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से सर्वसम्मति में लिए गए हैं.
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर एक बार फिर से चर्चा तेज है. मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच कम से कम 14 मौकों पर आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज कराई.
रिपोर्ट में कहा गया कि ये आपत्तियां नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने, फॉर्म 6 में बदलाव तथा मतदाता सूची के डेटा की निगरानी जैसे मुद्दों से जुड़ी थीं.
चुनाव आयोग ने दावे को किया खारिज
रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि दोनों आयुक्तों ने कुछ फैसलों को उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना लिए जाने पर सवाल उठाए. चुनावी डेटा और आईटी सिस्टम के नियंत्रण को लेकर भी उनकी ओर से चिंताएं दर्ज कराई गई थीं. अब रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग के सूत्रों ने इसे लेकर सफाई दी. आयोग के मुताबिक, SIR सहित उसके सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं और इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी शामिल रही है. आयोग ने इस तरह अंदरूनी मतभेद के दावे को खारिज किया है.
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फॉर्म 6 और वोटर डेटा को लेकर सवाल
रिपोर्ट में फॉर्म 6 में किए गए बदलाव का भी जिक्र किया गया है. यह फॉर्म नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होता है. रिपोर्ट के मुताबिक, फॉर्म में SIR से जुड़ा एक नया सवाल जोड़ा गया था. रिपोर्ट में दावा है कि संधू और जोशी ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई और इसे हटाने की बात कही थी.
इसके अलावा, चुनावी रोल के डिजिटल डेटाबेस और उसके नियंत्रण को अधिक केंद्रीकृत किए जाने को लेकर भी दोनों आयुक्तों की ओर से सवाल उठाए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है. रिपोर्ट के बाद कांग्रेस ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. वहीं NCP सांसद सुप्रिया सुले ने भी रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि यह मामला चौंकाने वाला है और चुनाव प्रक्रिया में प्रत्येक नागरिक के मताधिकार की समानता बेहद महत्वपूर्ण है.