'चीन-PAK हो जाए सावधान...,' DRDO ने तैयार किया स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम; एक साथ तीन लक्ष्य को निशाना
यह सफल परीक्षण और मिशन सुदर्शन चक्र की शुरुआत भारत की रक्षा क्षमताओं में एक नए युग की शुरुआत है. स्वदेशी तकनीक पर आधारित यह प्रणाली न केवल भारत को आत्मनिर्भर बनाएगी बल्कि वैश्विक मंच पर भी उसकी स्थिति को मजबूत करेगी.
भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं में एक और मील का पत्थर हासिल किया है. रक्षा मंत्रालय ने रविवार (24 अगस्त) को घोषणा की कि ओडिशा तट के पास एक नई एकीकृत एयर डिफेंस सिस्टम (IADWS) का सफल परीक्षण किया गया, जिसमें कई हथियारों ने अलग-अलग ऊंचाइयों और दूरी पर तीन टारगेटों को नष्ट किया. यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मिशन सुदर्शन चक्र के तहत स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम विकसित करने की घोषणा के कुछ दिनों बाद आई है, जिसका लक्ष्य अगले 10 सालों में भारत की सैन्य और नागरिक सुविधाओं को हवाई हमलों से बचाने के लिए एक मजबूत रक्षा कवच तैयार करना है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा आयोजित इस पहले टेस्ट में एकीकृत एयर डिफेंस सिस्टम (IADWS) ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया. यह प्रणाली त्वरित प्रतिक्रिया सतह-से-हवा मिसाइल (QRSAM), बहुत कम दूरी की एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS), और लेजर-आधारित निर्देशित ऊर्जा हथियार का एक बहु-स्तरीय संयोजन है. यह प्रणाली भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा ढाल का हिस्सा है, जिसे मिशन सुदर्शन चक्र के तहत और मजबूत किया जाएगा.
एकीकृत एयर डिफेंस सिस्टम: शक्ति का नया प्रतीक
रक्षा मंत्रालय ने बताया, “उड़ान परीक्षणों के दौरान, तीन अलग-अलग लक्ष्यों, जिसमें दो हाई स्पीड वाले स्थिर पंख वाले मानवरहित हवाई वाहन और एक मल्टी-कॉप्टर ड्रोन शामिल थे, उसको QRSAM, VSHORADS और हाई-ऊर्जा लेजर हथियार प्रणाली द्वारा कई दूरी और ऊंचाइयों पर एक साथ नष्ट किया गया.”
जानिए इस मिसाइल की क्या हैं खास विशेषताएं?
टेस्ट के दौरान, मिसाइल प्रणालियों, ड्रोन का पता लगाने और नष्ट करने की प्रणाली, कमांड और नियंत्रण प्रणाली, संचार प्रणाली, और रडार ने बिना किसी कमी के काम किया. चांदीपुर में एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) द्वारा तैनात उपकरणों ने उड़ान डेटा को कैप्चर कर इसकी सफलता की पुष्टि की. यह सिस्टम हैदराबाद में रक्षा अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला (DRDL) द्वारा विकसित केंद्रीकृत कमांड और नियंत्रण केंद्र द्वारा संचालित होती है, जो इसे एकीकृत और प्रभावी बनाता है.
स्वदेशी लेजर हथियार: वैश्विक स्तर पर बढ़ी भारत की धमक
इस साल अप्रैल में भारत ने स्वदेशी लेजर हथियार का परीक्षण किया था, जिसने लंबी दूरी के स्थिर पंख वाले ड्रोनों, स्वार्म ड्रोनों, और निगरानी उपकरणों को नष्ट करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया. इस तकनीक में महारत हासिल करने वाले देशों की लिस्ट में भारत अब अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन, जर्मनी और इजरायल जैसे देशों के साथ शामिल हो गया है. यह तकनीक मिसाइलों, ड्रोनों और छोटे प्रोजेक्टाइल्स को निष्क्रिय करने में सक्षम है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा, “इस अनूठे उड़ान परीक्षण ने हमारे देश की बहु-स्तरीय वायु रक्षा क्षमता को स्थापित किया है और यह दुश्मन के हवाई खतरों के खिलाफ महत्वपूर्ण सुविधाओं की क्षेत्र रक्षा को मजबूत करेगा.”
मिशन सुदर्शन चक्र: रक्षा और आक्रमण का संगम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में मिशन सुदर्शन चक्र की शुरुआत की घोषणा की थी. उन्होंने कहा, “यह एक शक्तिशाली हथियार प्रणाली होगी जो न केवल दुश्मन के हमले को निष्प्रभावी करेगी बल्कि जबरदस्त ताकत के साथ जवाबी हमला भी करेगी.” उन्होंने आगे कहा, “अगले 10 सालों में, 2035 तक, मैं इस राष्ट्रीय सुरक्षा ढाल को विस्तारित, मजबूत और आधुनिक बनाना चाहता हूं. भगवान श्री कृष्ण से प्रेरणा लेते हुए, हमने सुदर्शन चक्र का मार्ग चुना है.”
ऑपरेशन सिंदूर में आकाशतीर की रही अहम भूमिका
स्वदेशी वायु रक्षा नियंत्रण और रिपोर्टिंग प्रणाली, आकाशतीर, ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत के सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इस हमले में 26 लोग मारे गए थे. इसके जवाब में भारत ने 7 मई को तड़के पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी और सैन्य ठिकानों पर हमला किया. 10 मई की शाम तक चले इस अभियान में भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान और PoK में नौ आतंकी शिविरों को नष्ट किया, जिसमें कम से कम 100 आतंकवादी मारे गए, और 13 पाकिस्तानी हवाई अड्डों और सैन्य ठिकानों पर हमले किए.
आकाशतीर ने पाकिस्तानी हवाई हमलों की कई लहरों को विफल किया. यह सिस्टम भारतीय वायु सेना के एकीकृत वायु कमांड और नियंत्रण प्रणाली (IACCS) के साथ मिलकर काम करती है, जो भारत की चार-स्तरीय वायु रक्षा ढाल का मुख्य केंद्र है. इसने पाकिस्तानी मिसाइलों और ड्रोनों का तुरंत पता लगाने, उनकी पहचान करने, ट्रैक करने और उन्हें नष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.