दिल्ली में 'क्लाउड सीडिंग' की बेअसर! साफ रहा आसमान, IIT कानपुर ने बताया क्यों फेल हुआ ट्रायल
दिल्ली में प्रदूषण से राहत के लिए की गई क्लाउड सीडिंग की कोशिश बेनतीजा रही. IIT कानपुर की रिपोर्ट के मुताबिक, मौसम की स्थिति कृत्रिम वर्षा के अनुकूल नहीं थी, फिर भी दो बार क्लाउड सीडिंग की गई.
नई दिल्ली: दिल्ली की जहरीली हवा से निजात पाने के लिए सरकार ने कृत्रिम वर्षा यानी क्लाउड सीडिंग का सहारा लिया, लेकिन आसमान से उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं हुई.
IIT कानपुर द्वारा किए गए इस ट्रायल से यह तो साफ हो गया कि फिलहाल मौसम की स्थिति इस तकनीक के लिए अनुकूल नहीं है. रिपोर्ट में कहा गया कि सीमित नमी के बावजूद कुछ इलाकों में प्रदूषण स्तर में मामूली सुधार जरूर दर्ज हुआ, लेकिन वास्तविक वर्षा नहीं हो पाई.
'फिलहाल हालात सही नहीं'
मौसम विशेषज्ञ डॉ. अक्षय देओरास ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर के ऊपर पर्याप्त नमी नहीं है. बादल तो हैं, लेकिन वे बारिश कराने लायक विकसित नहीं हुए. क्लाउड सीडिंग तभी असरदार होती है जब बादलों में ऊर्ध्वाधर विकास और वातावरण में 60% से अधिक नमी हो. वर्तमान में दोनों ही स्थितियां दिल्ली में मौजूद नहीं हैं, इसलिए यह प्रयोग वैज्ञानिक रूप से उचित समय पर नहीं किया गया.
IIT कानपुर की रिपोर्ट में क्या कहा गया
IIT कानपुर की रिपोर्ट के मुताबिक 27 से 29 अक्टूबर के बीच दो बार क्लाउड सीडिंग की गई. पहली फ्लाइट 12:13 PM पर उड़ी और 2:30 PM पर मेरठ में लैंड की, जबकि दूसरी उड़ान 3:45 PM से 4:45 PM तक चली. दोनों ऑपरेशन में लगभग 7 किलो रासायनिक मिश्रण छोड़ा गया. रिपोर्ट के अनुसार IMD के अनुमानों में नमी का स्तर मात्र 10–15% था, जो क्लाउड सीडिंग के लिए काफी कम है.
प्रदूषण में कितनी आई कमी
रिपोर्ट में बताया गया कि क्लाउड सीडिंग के बाद PM2.5 में 6–10% और PM10 में 14–21% की कमी दर्ज की गई. यह सुधार वास्तविक वर्षा से नहीं, बल्कि हवा में बढ़ी नमी से कणों के नीचे बैठने के कारण हुआ. मयूर विहार, करोल बाग और बुराड़ी जैसे इलाकों में पीएम स्तर में 15–20% तक कमी देखी गई. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ये सुधार अस्थायी हैं और दीर्घकालिक समाधान नहीं माने जा सकते.
बारिश के नाम पर बस 0.1 mm बूंदाबांदी
IIT कानपुर की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे प्रयोग के दौरान केवल नोएडा में शाम 4 बजे के आसपास 0.1 mm हल्की बूंदाबांदी दर्ज की गई. यानी कृत्रिम वर्षा के स्तर पर परिणाम लगभग शून्य रहा. हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे वातावरणीय डेटा और भविष्य की रणनीतियों के लिए उपयोगी जानकारी जरूर मिली है, जिससे अगली बार अधिक प्रभावी प्रयोग किए जा सकेंगे.
राजनीति में भी गूंजी बारिश की चर्चा
AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने सरकार के इस प्रयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि 'बारिश में भी फर्जीवाड़ा, कृत्रिम वर्षा का कोई निशान नहीं.' उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि 'लगता है सरकार ने सोचा होगा इंद्र देवता खुद मदद करेंगे.' हालांकि पर्यावरण विभाग का दावा है कि यह केवल एक ट्रायल था और आने वाले महीनों में मौसम के अनुकूल हालात बनते ही बड़े पैमाने पर सीडिंग की जाएगी.
भविष्य के लिए क्या सुझाव दिए गए
IIT कानपुर ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भविष्य में क्लाउड सीडिंग तभी की जाए जब वातावरण में कम से कम 60% नमी और बादल विकसित अवस्था में हों. रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया कि ट्रायल के बाद मिट्टी के सैंपल में कोई हानिकारक रासायनिक प्रभाव नहीं मिला. विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि प्रदूषण कम करने के लिए यह तकनीक संभावनाओं से भरी है, लेकिन इसका सही समय और मौसम का चुनाव बेहद अहम है.