6 राज्यों की 8 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव का हुआ ऐलान, अजित पवार की बारामती सीट पर इस दिन होगी वोटिंग

महाराष्ट्र की चर्चित बारामती विधानसभा सीट पर भी दूसरे चरण में यानी 23 अप्रैल को मतदान कराया जाएगा. बताया जा रहा है कि इस सीट से उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाली सुनेत्रा पवार चुनावी मैदान में उतर सकती हैं.

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Anuj

नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में होने वाले चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया है. आयोग के मुताबिक, इन राज्यों में अप्रैल महीने में ही वोटिंग होगी. इसके साथ ही छह राज्यों की आठ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराने की घोषणा कर दी गई है.

चुनाव आयोग के अनुसार, इन उपचुनावों को दो चरणों में कराया जाएगा. पहले चरण में 9 अप्रैल को मतदान होगा. इस चरण में गोवा, कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा की एक-एक विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए वोटिंग होगी. वहीं. दूसरे चरण में 23 अप्रैल को मतदान कराया जाएगा. इस चरण में महाराष्ट्र और गुजरात की दो-दो सीटों पर उपचुनाव होंगे.

बारामती विधानसभा सीट पर उपचुनाव

महाराष्ट्र की चर्चित बारामती विधानसभा सीट पर भी दूसरे चरण में यानी 23 अप्रैल को मतदान कराया जाएगा. यह सीट पहले अजित पवार के पास थी. बताया जा रहा है कि इस सीट से उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाली सुनेत्रा पवार चुनावी मैदान में उतर सकती हैं. वह एनसीपी विधायक दल की अध्यक्ष भी हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी और क्षेत्र में मजबूत पकड़ होने के कारण इस सीट पर उनकी जीत की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है.

मुख्य चुनाव आयुक्त की प्रेस कॉन्फ्रेंस

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को चुनाव होगा और नतीजे 4 मई को आएंगे. वहीं पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को चुनाव होगा और नतीजे 4 मई को आएंगे. तमिलनाडु में 23 अप्रैल को चुनाव होगा और नतीजे 4 मई को आएंगे.

यानी सभी पांच राज्यों के नतीजे 4 मई को ही घोषित किए जाएंगे. पश्चिम बंगाल सरकार की मांग के अनुसार इस बार राज्य में चुनाव दो ही चरणों में रखा गया है. ममता सरकार ने मांग की थी कि इस बार चुनाव कम चरणों में किया जाए. पिछली बार पश्चिम बंगाल में 8 चरणों में चुनाव हुआ था. 

आयोग ने उठाए बड़े कदम

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनाव की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए चुनाव आयोग ने कई बड़े कदम उठाए हैं और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) भी उसी प्रक्रिया का हिस्सा है जिसके तहत प्रत्येक पात्र मतदाता को मतदाता सूची में बनाए रखने और अपात्र मतदाता को मतदाता सूची से बाहर करने की कोशिश की गई है.