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CJI चंद्रचूड़ ने द्वारकाधीश और जगन्नाथ मंदिर यात्रा का किया जिक्र, बताया 'ध्वज' का खास महत्व

जिला अदालतों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि ये अदालतें न्याय का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं. 

Amit Mishra

Dwarkadheesh and Lord Jagannath Temple Dhwaj: भारत के प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ (DY Chandrachud) ने कहा है कि न्यायपालिका में तकनीक का अनुकूलन ना केवल आधुनिकीकरण से संबंधित है, बल्कि न्याय तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने की दिशा में एक रणनीतिक कदम भी है. उन्होंने प्रौद्योगिकी का उपयोग करने के लिए वकीलों को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया. राजकोट में न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने नए जिला न्यायालय भवन के उद्घाटन अवसर पर एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि इस तरह की प्रगति से ये सुनिश्चित होगा कि न्याय प्रदान करना भौगोलिक और तकनीकी बाधाओं के कारण बाधित ना हो.

'हर नागरिक को न्याय का अधिकार सुनिश्चित है' 

डीवाई चंद्रचूड़ ने कार्यक्रम स्थल से एआई-आधारित ‘टेक्स्ट-टू-स्पीच कॉल-आउट सिस्टम’ का भी उद्घाटन किया. जिला अदालतों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, “ये अदालतें न्याय का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं और एक ऐसे समाज की कल्पना करने में हमारे संविधान के आदर्शों की आधारशिला हैं जहां प्रत्येक नागरिक को न्याय का अधिकार सुनिश्चित है.”

'सीजेआई ने किया यात्रा का उल्लेख'

सीजेआई ने सोमनाथ और द्वारका के मंदिरों की अपनी यात्रा का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि द्वारकाधीश मंदिर का ‘ध्वज’ (ध्वज), जो ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ के मंदिर के समान है, न्यायिक समुदाय के लोगों के लिए एक विशेष अर्थ रखता है. उन्होंने कहा, “हमारे राष्ट्र में परिवर्तन की इस सार्वभौमिकता को देखें जो हम सभी को एक साथ बांधती है. इस ‘ध्वज’ का हमारे लिए एक विशेष अर्थ है, और ‘ध्वज’ हमें जो अर्थ देता है वो ये है कि वकीलों, न्यायाधीशों और नागरिकों के रूप में हम सभी के ऊपर एक एकीकृत शक्ति है – और वो एकीकृत शक्ति हमारी मानवता है, जो कानून के शासन और भारत के संविधान द्वारा शासित है.”

वकीलों को प्रशिक्षित किया जाए

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने अदालत परिसर में नवीनतम ऑडियो-वीडियो उपकरणों और प्रणालियों से सुसज्जित एक सम्मेलन कक्ष तथा एक प्रशिक्षण कक्ष के बारे में कहा, “ये उच्चतम न्यायालय के कक्षों में लागू हाईब्रिड और ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस सिस्टम और बदलते समय के अनुरूप है तथा त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकियों का लाभ उठा रहा है.” उन्होंने प्रधान जिला न्यायाधीश से ये सुनिश्चित करने की अपील करते हुए कहा कि वकीलों को प्रौद्योगिकी के उपयोग में प्रशिक्षित किया जाए और उन्हें उस पहलू में न्यायाधीशों से अलग नहीं किया जाना चाहिए.