Budget 2026: सीनियर सिटिजन्स को निर्मला सीतारमण टैक्स में छूट देकर देंगी राहत? पेंशन को लेकर ही लगाई है आस

बजट 2026 से वरिष्ठ नागरिकों को बड़ी उम्मीदें हैं. टैक्स छूट बढ़ाने, पेंशन संशोधन, सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं और संगठित सीनियर केयर सिस्टम की मांग तेज हो गई है.

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Kuldeep Sharma

जैसे-जैसे भारत की आबादी उम्रदराज हो रही है, वरिष्ठ नागरिकों की जरूरतें अब अनदेखी नहीं की जा सकतीं. बढ़ती उम्र, महंगा इलाज और बदलती पारिवारिक संरचना ने बुज़ुर्गों की चुनौतियां बढ़ा दी हैं. बजट 2026 से पहले वरिष्ठ नागरिक, सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों की मांग है कि सरकार ठोस नीतियों के जरिये स्वास्थ्य, पेंशन, टैक्स राहत और देखभाल से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत करे, ताकि बुज़ुर्गों को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन मिल सके.

संरचित सीनियर केयर की बढ़ती जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत एक स्पष्ट जनसांख्यिकीय बदलाव से गुजर रहा है. लोग लंबी उम्र जी रहे हैं, लेकिन कई बुज़ुर्ग लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों से जूझ रहे हैं. संयुक्त परिवारों के टूटने से घर पर देखभाल संभव नहीं रह गई है. अंतरा सीनियर केयर के एमडी और सीईओ रजित मेहता कहते हैं कि बजट 2026 सीनियर केयर इकोसिस्टम को दिशा दे सकता है. दीर्घकालिक देखभाल को बीमा कवरेज में शामिल करना बड़ी राहत होगी.

बीमा की कमी और प्रशिक्षित केयरगिवर्स

असिस्टेड लिविंग और सीनियर हेल्थकेयर में निवेश बढ़ रहा है, लेकिन सिर्फ पूंजी पर्याप्त नहीं है. अंतरा असिस्टेड केयर सर्विसेज के सीईओ ईशान खन्ना के अनुसार, देखभाल सेवाएं आम परिवारों की पहुंच से बाहर हैं. बीमा में होम केयर और असिस्टेड लिविंग शामिल न होने से बोझ बढ़ता है. साथ ही, गैर-चिकित्सकीय केयरगिवर्स को जेरियाट्रिक ट्रेनिंग देना और केयरगिविंग को एक मान्यता प्राप्त पेशा बनाना बेहद जरूरी है.

स्वास्थ्य, पेंशन और महंगाई की चिंता

हेल्पएज इंडिया की नीति प्रमुख अनुपमा दत्ता कहती हैं कि स्वास्थ्य बीमा और पेंशन आज भी बुज़ुर्गों की सबसे बड़ी चिंता हैं. पीएमजेएवाई के तहत 70 वर्ष से ऊपर के लोगों को कवर मिला है, लेकिन 60+ आयु वर्ग के कई लोग इससे बाहर हैं. निजी बीमा बेहद महंगा है. सरकार और बीमा कंपनियों के साझा सब्सिडी मॉडल से प्रीमियम कम हो सकता है. साथ ही, 45–60 आयु वर्ग में बीमा जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है.

पेंशन संशोधन और ग्रामीण आजीविका

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के तहत मिलने वाली पेंशन वर्षों से नहीं बढ़ी है. अनुपमा दत्ता का कहना है कि 60+ बुज़ुर्गों के लिए न्यूनतम पेंशन 1000 रुपये और 80+ के लिए 1500 रुपये प्रति माह होनी चाहिए. इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में बुज़ुर्गों के लिए एल्डर सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स को बढ़ावा देकर उनकी आजीविका और वित्तीय समावेशन को मजबूत किया जा सकता है.

सुरक्षा, डिजिटल समावेशन और टैक्स राहत

बुज़ुर्गों के खिलाफ बढ़ते साइबर अपराध और शोषण चिंता का विषय हैं. डिजिटल साक्षरता, इंटरनेट और डिवाइस तक पहुंच बेहद जरूरी हो गई है. टैक्स मोर्चे पर मांग है कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए सालाना 10 लाख रुपये तक की आय टैक्स-फ्री हो. एफडी पर ब्याज को टैक्स से मुक्त किया जाए और धारा 80TTB की सीमा 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख रुपये की जाए.

बजट 2026 को भारत के बुज़ुर्गों के भविष्य की नींव रखने का अवसर माना जा रहा है. अगर स्वास्थ्य, पेंशन, टैक्स और देखभाल से जुड़ी ये अपेक्षाएं पूरी होती हैं, तो करोड़ों वरिष्ठ नागरिक सम्मान, सुरक्षा और सुकून के साथ जीवन जी सकेंगे.