BMC चुनाव के बाद लौटी 'होटल पॉलिटिक्स', महायुति में मेयर पद को लेकर फंसा पेंच तो उद्धव सेना ने किया संगीन दावा
बीएमसी चुनाव में बहुमत के बावजूद बीजेपी और शिंदे गुट के बीच मेयर पद को लेकर सहमति नहीं बन पाई है. सत्ता साझेदारी पर खींचतान जारी है और मुंबई की राजनीति अभी स्थिर नहीं दिखती.
नई दिल्ली: मुंबई की राजनीति में बीएमसी चुनाव के नतीजों के बाद भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है. बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के पास मिलकर बहुमत जरूर है, लेकिन मेयर पद और सत्ता के बंटवारे को लेकर तस्वीर साफ नहीं हो पाई है. शिंदे गुट द्वारा नवनिर्वाचित पार्षदों को होटल में ठहराने के फैसले ने राजनीतिक हलकों में अटकलों को और तेज कर दिया है.
227 सदस्यीय बीएमसी में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और उसके पास 89 सीटें हैं. हालांकि, मेयर चुनने के लिए जरूरी 114 का आंकड़ा वह अकेले नहीं छू पाती. शिंदे गुट की शिवसेना के 29 पार्षदों के साथ मिलकर गठबंधन के पास 118 सीटें हैं. इसके बावजूद यह तय नहीं हो पाया है कि मेयर की कुर्सी किसके हिस्से आएगी और कितने समय के लिए.
होटल में पार्षद, बढ़ीं अटकलें
शनिवार को शिंदे गुट ने अपने सभी नवनिर्वाचित पार्षदों को बांद्रा के एक पांच सितारा होटल में ठहराया. शिवसेना ने इसे तीन दिन का प्रशिक्षण और कार्यशाला बताया, जिसमें पार्षदों को नगर प्रशासन, बजट और विकास योजनाओं की जानकारी दी जाएगी. हालांकि, विरोधी दल इसे सत्ता समीकरण से जोड़कर देख रहे हैं.
फडणवीस ने साधा संतुलन
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोड़ेबाजी की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि महायुति में कोई तनाव नहीं है. उन्होंने कहा कि जैसे वे पुणे में बीजेपी पार्षदों से मिल रहे हैं, वैसे ही एकनाथ शिंदे मुंबई में अपने पार्षदों से मिल सकते हैं. फडणवीस ने भरोसा जताया कि दोनों दल मिलकर तय करेंगे कि मेयर कौन होगा और कार्यकाल कैसा रहेगा.
शिंदे गुट की शर्तें साफ
शिवसेना के वरिष्ठ नेताओं ने साफ कहा है कि वे मेयर पद पहले ढाई साल के लिए चाहते हैं. साथ ही, स्थायी समिति और अन्य अहम समितियों में भी हिस्सेदारी की मांग रखी गई है. शिंदे गुट का तर्क है कि सत्ता में संतुलन बनाए रखने और राजनीतिक सम्मान के लिए यह जरूरी है. बीजेपी के पास अकेले मेयर चुनने के लिए संख्या बल नहीं है, इसलिए समझौता अनिवार्य है.
विपक्ष ने साधा निशाना
उधर, शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने होटल में पार्षदों को रखने को गठबंधन की असुरक्षा बताया. उन्होंने दावा किया कि शिंदे गुट के कई पार्षद मूल रूप से उनकी पार्टी से आए हैं और फिर टूट संभव है. ठाकरे ने बीजेपी पर मुंबई को गिरवी रखने का आरोप लगाया और कहा कि उनकी हार उजली है, जबकि सत्ता पक्ष की जीत दागदार है.
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