डिजिटल मार्किंग विवाद के बीच सीबीएसई में बड़ा बदलाव! जानें कौन हैं बोर्ड के नए 'बॉस' लोखंडे सीताराम

डिजिटल मार्किंग सिस्टम के बढ़ते विवाद के बीच केंद्र सरकार ने सीबीएसई में बड़ा फेरबदल किया है. सीनियर आईएएस अधिकारी लोखंडे प्रशांत सीताराम को बोर्ड का नया चेयरमैन और वरुण भारद्वाज को नया सेक्रेटरी नियुक्त किया गया है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े शिक्षा बोर्ड केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है. लंबे समय से ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली को लेकर जारी खींचतान और विवादों के बीच सरकार ने एक ही झटके में बोर्ड के अध्यक्ष और सचिव दोनों को हटाकर नए चेहरों की ताजपोशी कर दी है. इस अचानक हुए बदलाव को शिक्षा विभाग में शुचिता और पारदर्शिता बहाल करने के एक बड़े प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.

इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव की घोषणा ठीक उस वक्त हुई जब सरकार ने डिजिटल मार्किंग सेवाओं से जुड़े टेंडर और खरीद की उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी किए. वरिष्ठ आईएएस अधिकारी लोखंडे प्रशांत सीताराम को सीबीएसई का नया कमान सौंपते हुए चेयरमैन बनाया गया है. वे वर्तमान में गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे. उन्होंने पूर्व अध्यक्ष राहुल सिंह का स्थान लिया है, जिन्हें अब कृषि मंत्रालय में भेज दिया गया है.

नए सचिव की नियुक्ति और सख्त कदम

चेयरमैन के साथ ही सरकार ने वरिष्ठ ब्यूरोक्रेट वरुण भारद्वाज को सीबीएसई का नया सचिव नियुक्त किया है. वे शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग में निदेशक के पद पर तैनात थे. भारद्वाज ने पूर्व सचिव हिमांशु गुप्ता की जगह ली है. महत्वपूर्ण बात यह है कि हिमांशु गुप्ता को न केवल उनके मूल कैडर में वापस भेजा गया है, बल्कि उन पर साल 2030 तक किसी भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए अयोग्य होने की सख्त शर्त भी लगाई गई है.

कॉपियां बदलने के आरोपों से मचा हड़कंप

यह पूरा बड़ा फेरबदल बोर्ड परीक्षाओं के 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) सिस्टम पर उठे गंभीर सवालों के कारण हुआ है. दरअसल, देश भर के छात्रों और अभिभावकों ने डिजिटल मूल्यांकन में भारी गड़बड़ियों, तकनीकी त्रुटियों और कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन में हो रही देरी की शिकायतें दर्ज कराई थीं. हद तो तब हो गई जब बारहवीं कक्षा के कई परीक्षार्थियों ने आरोप लगाया कि बोर्ड द्वारा दिखाई गई कॉपियों की लिखावट उनकी अपनी लिखावट से बिल्कुल अलग थी.

राधा चौहान की अगुवाई में जांच कमेटी

सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक बढ़ते आक्रोश को देखते हुए केंद्र सरकार ने इस पूरे तकनीकी टेंडर और मूल्यांकन व्यवस्था की जांच के लिए क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान की अगुवाई में एक सदस्यीय विशेष समिति का गठन किया है. इस कमेटी को एक महीने के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट शासन को सौंपनी होगी. इस जांच के दायरे में डिजिटल प्रणाली को लागू करने वाली निजी कंपनियां भी शामिल हैं.

विपक्ष ने सरकार को घेरा

इस बड़े ब्यूरोक्रेटिक बदलाव के बाद देश में सियासत भी पूरी तरह गरमा गई है. कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस कदम को सरकार का एक बड़ा 'कवर-अप' यानी सच को दबाने की कोशिश करार दिया है. राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि तकनीकी गड़बड़ी के लिए सिर्फ अधिकारियों पर गाज क्यों गिरी और असली गुनहगार होने के बावजूद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद पर क्यों बनाए रखा गया है.