संजय कपूर की 30,000 करोड़ की संपत्ति की लड़ाई? रानी कपूर के बहू पर शक जताने के बीच सामने आया सच
सरे कोरोनर कार्यालय ने कहा कि जांच से पता चला है कि संजय कपूर की मृत्यु प्राकृतिक कारणों से हुई और मृत्यु के कारणों के रूप में बाएं वेंट्रिकुलर हाइपरट्रॉफी और इस्केमिक हृदय रोग को सूचीबद्ध किया गया.
उद्योगपति संजय कपूर की पिछले महीन लंदन में पोलो खेलते समय मौत हो गई. मौत कारण मधुमक्खी का काटना बताया गया है. हालांकि उनकी मां मौत की जांच की मांग कर रही हैं. संजय कपूर की मौत के बाद 30,000 करोड़ रुपये के सोना समूह पर नियंत्रण के लिए सास बनाम बहू की लड़ाई शुरू हो गई है.
सरे कोरोनर कार्यालय ने कहा कि जांच से पता चला है कि उनकी (यानी संजय कपूर की) मृत्यु प्राकृतिक कारणों से हुई और मृत्यु के कारणों के रूप में बाएं वेंट्रिकुलर हाइपरट्रॉफी और इस्केमिक हृदय रोग को सूचीबद्ध किया गया.
मां मौत को बताई अंतरराष्ट्रीय साजिश
कोरोनर कार्यालय ने कहा कि इसके मद्देनजर, कोरोनर्स एंड जस्टिस एक्ट 2009 की धारा 4 के अनुसार अब जांच बंद कर दी गई है. अब किसी जांच की आवश्यकता नहीं होगी. प्रिया कपूर के करीबी सूत्रों ने बताया कि इससे साबित होता है कि इसमें कोई 'गड़बड़ी' नहीं हुई थी और यह रिपोर्ट कुछ दिन पहले ही कपूर की मां रानी कपूर के साथ साझा की गई थी. सूत्रों ने यह भी कहा कि बाद में उनके ये दावे कि उनकी 'एक अंतरराष्ट्रीय साज़िश के तहत हत्या' की गई, हैरान करने वाले हैं.
संपत्ति की विरासत की लड़ाई
पिछले सप्ताह रानी कपूर ने सरे पुलिस को पत्र लिखकर कहा था कि उनके पास "विश्वसनीय और चिंताजनक साक्ष्य हैं जो बताते हैं कि उनकी मृत्यु आकस्मिक या स्वाभाविक नहीं थी, बल्कि इसमें गड़बड़ी हो सकती है. उन्होंने उन अभिलेखों के बारे में बताया जो "जालसाजी, संदिग्ध संपत्ति हस्तांतरण और कानूनी फाइलिंग की ओर इशारा करते हैं, (और) उन व्यक्तियों (जैसे, प्रिया कपूर) के बीच मिलीभगत के संकेत देते हैं जिन्हें उनकी मृत्यु से आर्थिक लाभ हुआ."
यह पत्र उस तेज़ी से सार्वजनिक हो रहे पारिवारिक मामले में एक नया मोड़ था, जिसकी शुरुआत सोना कॉमस्टार के बोर्ड को उनके द्वारा वार्षिक आम बैठक स्थगित करने की मांग वाले ईमेल से हुई थी. उन्होंने खुद को 'सोना समूह', जिसमें सोना कॉमस्टार और सोना बीएलडब्ल्यू प्रिसिजन फोर्जिंग्स लिमिटेड शामिल हैं का 'बहुसंख्यक शेयरधारक' बताया और आरोप लगाया कि अपने बेटे के लिए शोक मनाते हुए उन्हें "दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर" किया गया था.