भोपाल की एक गली में हो गई 'जिंदगी की शाम', उर्दू महफिल के मशहूर शायर बशीर बद्र नहीं रहे
र्दू किताब का एक पन्ना हमेशा के लिए बंद हो गया है. आज सदी के महान उर्दू शायर बशीर बद्र साहब ने अंतिम सांस ले ली है.
भोपाल: एक चराग बुझ गया... शब्दों की एक नदी सूख गई... मोहब्बत की दुनिया के सन्नाटे की एक गूंज अब कभी सुनाई नहीं देगी. अब कोई बेववफा लोगों की मजबूरियों को नहीं समझेगा. आज उन मजबूर प्रेमिकाओं की आवाज अनंत लोक में गुम हो गई है जो चुपचाप अपने दर्द के सात दिल पर पत्थर रख लेती थीं. आज उर्दू किताब का एक पन्ना हमेशा के लिए बंद हो गया है. आज सदी के महान उर्दू शायर बशीर बद्र साहब ने अंतिम सांस ले ली है.
डॉ. बशीर बद्र का गुरुवार को 91 वर्ष की उम्र में भोपाल में निधन हो गया. उन्होंने अपने घर पर आखिरी सांस ली. उनके जाने से साहित्य जगत और उनके चाहने वालों में शोक की लहर दौड़ गई है. उन्होंने अपने पीछे शायरी और गजलों की एक ऐसी अनमोल विरासत छोड़ी है जो हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगी.
आधुनिक शायरी की सबसे प्रभावी आवाज
डॉ. बशीर बद्र को आधुनिक उर्दू शायरी की सबसे प्रभावशाली आवाजों में से एक माना जाता था. पिछले कई दशकों से उन्होंने प्यार, अकेलापन, रिश्ते, दिल टूटने का दर्द और जिंदगी की सादगी जैसे जज्बातों को अपने बेहद आसान और गहरे शब्दों में पिरोया. उनकी शायरी सिर्फ उर्दू जानने वालों को ही नहीं बल्कि आम लोगों को भी बहुत पसंद आती थी क्योंकि उनकी बातें सीधे दिल को छूती थीं.
डिमेंशिया से जूझ रहे थे बशीर साहब
पिछले कुछ सालों से वह 'डिमेंशिया' नाम की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे जो इंसान की याददाश्त और सोचने की क्षमता को कमजोर कर देती है. इस बीमारी और ढलती उम्र के कारण उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता जा रहा था. रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले कुछ समय से वे अपनी याददाश्त लगभग पूरी तरह खो चुके थे और अपने करीबी रिश्तेदारों और दोस्तों को भी नहीं पहचान पा रहे थे. पिछले कुछ महीनों में उनकी हालत ज्यादा खराब हो गई थी और वे अपने परिवार की देखरेख में घर पर ही रह रहे थे.
डॉ. बशीर बद्र ने अपने खास अंदाज और दमदार विचारों से उर्दू अदब की दुनिया में एक बड़ा मुकाम हासिल किया था. उनकी गजलें इंसानी भावनाओं को बहुत ही सरल लेकिन असरदार तरीके से बयां करती थीं. उनके लिखे कई शेर इतने मशहूर हुए कि आज भी शायरी के शौकीन, छात्र और युवा लेखक अक्सर अपनी बातों में उनका जिक्र करते हैं.
हिंदी और उर्दू में छपी हैं किताबें
उनकी शायरी की कई किताबें हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं में छपीं. उनकी हिंदी गजलों के एक दर्जन से ज्यादा कलेक्शन और उर्दू के सात मशहूर कलेक्शन भारतीय साहित्य के लिए एक अनमोल खजाना माने जाते हैं. उनके काम ने कई पीढ़ियों के शायरों और पाठकों को प्रेरित किया है. उनके परिवार में उनकी पत्नी डॉ. राहत और बेटा तय्यब हैं. उनके जाने से उर्दू शायरी का एक चमकता सितारा हमेशा के लिए डूब गया है.