'सुधर जाओ, शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो...', अब बाबा रामदेव ने दी आंदोलन की चेतावनी
बाबा रामदेव ने स्वतंत्रता दिवस पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई. उन्होंने सरकारी स्कूलों की बदहाली और भर्ती प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार पर सवाल उठाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी.
योग गुरु बाबा रामदेव ने देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग करते हुए सरकारी स्कूलों की स्थिति पर चिंता जताई. स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि बच्चों को बेहतर शिक्षा और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए. उन्होंने संकेत दिया कि अगर सुधार नहीं हुए तो वह भविष्य में आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं.
‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के बीच आया बयान
रामदेव की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू किया है. इस अभियान के तहत महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के संतुक पिंपरी स्थित एक सरकारी स्कूल का निरीक्षण किया गया. अभियान से जुड़े लोगों ने स्कूल की बुनियादी सुविधाओं पर सवाल उठाए हैं.
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स्कूल में मिलीं कई खामियां
अभियान के दौरान स्कूल में पानी की व्यवस्था, पीने के पानी, बेंच और शौचालय जैसी सुविधाओं को लेकर समस्याएं सामने आने का दावा किया गया. इसके अलावा कुछ खिड़कियां टूटी हुई मिलने की बात कही गई. अभियान के आयोजकों ने सवाल उठाया कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए जरूरी सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध क्यों नहीं हैं.
सरकारी नौकरी की भर्ती पर भी सवाल
रामदेव ने सरकारी नौकरियों में इंटरव्यू प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि 90 से 99 प्रतिशत सरकारी नौकरी के इंटरव्यू में कथित तौर पर अनियमितताएं होती हैं. उनके अनुसार कुछ मामलों में खास पृष्ठभूमि, विचारधारा, संगठन, जाति या वर्ग से जुड़े उम्मीदवारों को प्राथमिकता दिए जाने का आरोप है. हालांकि, इन दावों के समर्थन में उन्होंने कोई आधिकारिक आंकड़ा पेश नहीं किया.
‘अराजकता वाला आंदोलन नहीं चाहता’
रामदेव ने कहा कि वह विरोध प्रदर्शन के जरिए अराजकता पैदा करने के पक्ष में नहीं हैं. उनका कहना था कि लोकतांत्रिक तरीके से व्यवस्था में सुधार की कोशिश होनी चाहिए. हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो भविष्य में आंदोलन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
CJP ने उठाया सरकारी स्कूलों का मुद्दा
CJP के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान में अभिजीत दिपके की टीम ने महाराष्ट्र के संतुक पिंपरी गांव के सरकारी स्कूल का ऑडिट किया था. टीम ने पानी, शौचालय, बेंच और टूटी खिड़कियों जैसी समस्याओं को सामने रखा. अभियान का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं की स्थिति पर सवाल उठाना और प्रशासन से जवाबदेही की मांग करना बताया गया है.
शिक्षा सुधार पर बढ़ रही बहस
रामदेव के बयान और CJP के अभियान ने सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता और बुनियादी ढांचे को लेकर बहस को फिर तेज कर दिया है. सरकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए बेहतर संसाधन, पारदर्शी भर्ती, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और नियमित निगरानी की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है. अब देखना होगा कि इन मांगों को लेकर सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं.