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Ayodhya Ram Mandir: प्राण प्रतिष्ठा से शिवसेना की दूरी, बाला साहब ठाकरे की पार्टी आज कहां खड़ी है?

Ayodhya Ram Mandir: आज बाला साहेब ठाकरे की जयंती है. वही बाला साहेब जिनकी पार्टी शिवसेना हिंदुत्व की रथ पर सवार होकर न सिर्फ़ महाराष्ट्र की सत्ता में रही बल्कि प्रदेश में बीजेपी का क़द कम करके रखा. लेकिन आज ऐसा क्या हो गया कि हिंदू की बात करने वाली पार्टी के सबसे बड़े नेता राम मंदिर के उद्घाटन में नहीं पहुंचे. आइए जानते हैं शिवसेना(उद्धव गुट) के फैसले के क्या मायने हैं.

Purushottam Kumar

Ayodhya Ram Mandir: 'अगर शिवसैनिकों ने राम मंदिर के लिए यह काम किया है (बाबरी ढांचा ढहाए जाने पर), तो मुझे गर्व है'. ये कथन हैं हिंदुत्व के बड़े चेहरों में शुमार रह चुके देश के कद्दावर नेता बाला साहेब ठाकरे की. ऐसा कहकर न सिर्फ़ उन्होंने महाराष्ट्र बल्कि देश की राजनीति में खलबली मचा दी थी. हिंदुत्व का राग गाने वालों के नसों में जोश भर दिया था. 

ऐसे में आज इन शब्दों को पढ़ने के बाद आपको लग रहा होगा कि अब जब राम मंदिर की भव्य प्राण प्रतिष्ठा हो चुका है तो मैं इन बातों की चर्चा क्यों कर रहा हूँ. 

दरअसल, मैं इस वक़्त आपको यह बात इसलिए याद दिलाना चाहता हूं कि आज बाला साहेब ठाकरे की जयंती है. वही बाला साहेब जिनकी पार्टी शिवसेना हिंदुत्व की रथ पर सवार होकर न सिर्फ़ महाराष्ट्र की सत्ता में रही बल्कि प्रदेश में बीजेपी का क़द कम करके रखा. लेकिन आज ऐसा क्या हो गया कि हिंदू की बात करने वाली पार्टी के सबसे बड़े नेता राम मंदिर के उद्घाटन में नहीं पहुंचे.

कार्यक्रम से शिवसेना (उद्धव गुट) ने बनाई दूरी

अब सवाल उठता है कि जिस हिंदुत्व का झंडा बुलंद कर अपने वोटरों के बीच अच्छे खासे लोकप्रिय हुई शिवसेना(उद्धव गुट) की हालत आज यह है कि वह रामलला की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में नहीं पहुंची. जिस कथित हिंदुत्व के भरोसे शिवसेना(उद्धव गुट) अपना झंडा बुलंद किए चलती थी आज उसी से जुड़े एक बड़े कार्यक्रम में शामिल नहीं हुई.

आपको बता दें कि कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बाला साहेब के बेटे उद्धव ठाकरे को स्पीड पोस्ट के जरिए निमंत्रण भेजा गया था. स्पीड पोस्ट के जरिए निमंत्रण भेजे जाने को लेकर संजय राउत ने ठाकरे परिवार के साथ किये गये इस व्यवहार को लेकर मोदी सरकार पर निशाना भी साधा था. अब सवाल है कि क्या उनका इस बात को लेकर रामलला प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में नहीं जाना सही है, जिसके लिए शिवसेना ने लड़ाई लड़ी.

शिवसेना(उद्धव गुट) के फैसले के क्या मायने

रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होने के लिए निमंत्रण मिलने के बाद भी शिवसेना (उद्धव गुट) ने कार्यक्रम से दूरी क्यों बनाई. जिसके बाद लोगों के मन में सवाल उठने लगा कि आखिर शिवसेना (उद्धव गुट) ऐसा करके क्या चाहती है. अब जब मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हो चुकी है तो ऐसे वक़्त में शिवसेना कहां खड़ी है?