menu-icon
India Daily

बांग्लादेश में चुनावी हलचल के बीच भारत का एहतियाती कदम, अधिकारियों को घर लौटने की दी सलाह

भारत-बांग्लादेश के रिश्ते पिछले कुछ दिनों से सही नहीं है. बांग्लादेश में होने वाले आम चुनाव से पहले भारत सरकार ने भारतीय अधिकारियों के परिवारों को स्वदेश लौटने की सलाह दी है.

shanu
Edited By: Shanu Sharma
बांग्लादेश में चुनावी हलचल के बीच भारत का एहतियाती कदम, अधिकारियों को घर लौटने की दी सलाह
Courtesy: X (@Ashoke_Raj)

नई दिल्ली: भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले कुछ दिनों से रिश्ते सही नहीं है. इसी बीच सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मंगलवार को भारत सरकार ने बांग्लादेश में तैनात भारतीय अधिकारियों के परिवारों को स्वदेश लौटने की सलाह दी है. भारत सरकार द्वारा यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब पड़ोसी देश में संसदीय चुनाव से पहले कानून-व्यवस्था को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.

बांग्लादेश में आगामी आम चुनाव और जनमत संग्रह कुछ ही हफ्तों दूर हैं. ऐसे में वहां की राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क मोड में हैं. सूत्रों ने स्पष्ट किया कि यह फैसला किसी आपात स्थिति का संकेत नहीं है, बल्कि संभावित जोखिमों को ध्यान में रखते हुए एक सावधानीपूर्ण कदम है. भारतीय अधिकारियों के आश्रितों को अस्थायी रूप से भारत लौटने की सलाह दी गई है.

बांग्लादेश का मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य अहम

न्यूज एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए अधिकारियों ने साफ किया कि ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग और बांग्लादेश के अन्य शहरों में मौजूद सभी भारतीय मिशन और कार्यालय पूरी तरह खुले रहेंगे और सामान्य रूप से काम करते रहेंगे. कूटनीतिक गतिविधियों या द्विपक्षीय संवाद पर इस फैसले का कोई असर नहीं पड़ेगा. भारत ने यह भी संकेत दिया है कि वह स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है.

इस फैसले की पृष्ठभूमि में बांग्लादेश का मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य अहम है. अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने हाल ही में जनता से अपील की थी कि वे आगामी जनमत संग्रह में उनके प्रशासन द्वारा पेश किए गए सुधार पैकेज का समर्थन करें. इन प्रस्तावों का उद्देश्य कार्यकारी शक्तियों पर नियंत्रण लगाना और सत्ता के केंद्रीकरण को रोकना बताया जा रहा है.

बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव

जनमत संग्रह में शामिल प्रमुख प्रस्तावों में एक ऐसा प्रावधान भी है, जिसके तहत कोई भी व्यक्ति दस साल से अधिक समय तक प्रधानमंत्री पद पर नहीं रह सकेगा. इसे बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़े संरचनात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है. समर्थकों का कहना है कि इससे लोकतंत्र मजबूत होगा, जबकि आलोचकों को आशंका है कि इससे राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है. यह जनमत संग्रह 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों के साथ ही आयोजित किया जाएगा. विशेषज्ञों के मुताबिक, यह चुनाव और जनमत संग्रह मिलकर बांग्लादेश की भविष्य की शासन प्रणाली की नींव रख सकते हैं.