कागजों पर डॉक्टर, फर्जी मरीज! ED की जांच में अल फलाह यूनिवर्सिटी के 'पापों' का खुलासा, 493 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में अल फलाह यूनिवर्सिटी पर फर्जी डॉक्टरों की नियुक्ति, नकली मरीज, नियमों के उल्लंघन और रेड फोर्ट ब्लास्ट से जुड़े आरोपों के साथ करीब ₹493 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का गंभीर आरोप सामने आया है.

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Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: दिल्ली के रेड फोर्ट के पास हुए नवंबर 2025 के धमाके से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच में प्रवर्तन निदेशालय ने हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय को कठघरे में खड़ा किया है. ED की चार्जशीट में विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली, नियुक्तियों और वित्तीय लेन-देन को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. जांच एजेंसी का दावा है कि नियमों को ताक पर रखकर संस्थान चलाया गया और छात्रों व नियामकों को गुमराह किया गया.

बिना सत्यापन के संदिग्ध डॉक्टरों की नियुक्ति

ED की जांच में सामने आया कि विश्वविद्यालय ने तीन ऐसे डॉक्टरों को नियुक्त किया, जिनका संबंध रेड फोर्ट धमाके से जुड़ा बताया गया है. इन नियुक्तियों के दौरान न तो पुलिस सत्यापन कराया गया और न ही किसी तरह की पृष्ठभूमि जांच हुई. विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने भी माना कि मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की भर्ती बिना पुलिस जांच के की जाती थी, जो गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है.

केवल कागजों पर मौजूद ‘डॉक्टर’

चार्जशीट के अनुसार, मेडिकल काउंसिल से जरूरी मंजूरी पाने के लिए कई डॉक्टर सिर्फ रिकॉर्ड में दिखाए गए. इन्हें सीमित दिनों की उपस्थिति या हफ्ते में दो दिन काम करने वाले शिक्षक के रूप में दर्शाया गया. ED का दावा है कि ये डॉक्टर न तो नियमित पढ़ाते थे और न ही अस्पताल में मरीजों का इलाज करते थे. इसका उद्देश्य केवल मान्यता बनाए रखना था.

निरीक्षण से पहले ‘नकली मरीज’

जांच एजेंसी ने संदेशों और वीडियो कॉल के साक्ष्य के आधार पर दावा किया कि निरीक्षण से ठीक पहले अस्पताल में नकली मरीज भर्ती किए जाते थे. सामान्य दिनों में अस्पताल लगभग खाली रहता था. ED के अनुसार, निरीक्षण के समय अस्थायी डॉक्टर बुलाए जाते थे ताकि संस्थान को पूरी तरह कार्यरत दिखाया जा सके और नियामक संस्थाओं को भ्रमित किया जा सके.

आतंक से जुड़े डॉक्टरों की भूमिका और नियुक्ति प्रक्रिया

विश्वविद्यालय की कुलपति और प्राचार्य ने ED को बताया कि तीनों विवादित डॉक्टर उनके कार्यकाल में नियुक्त हुए. ये नियुक्तियां मानव संसाधन विभाग की सिफारिश पर हुईं और अंतिम मंजूरी विश्वविद्यालय के चेयरमैन ने दी. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि किसी भी स्तर पर पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों से सत्यापन नहीं कराया गया, जिससे सवाल और गहरे हो गए हैं.

493 करोड़ की कथित कमाई और विदेशी कनेक्शन

ED ने इस मामले में कथित अपराध की आय 493.24 करोड़ रुपये का अनुमान लगाया है, जो छात्रों से कथित तौर पर झूठे दावों के आधार पर वसूली गई. एजेंसी ने चेयरमैन की भूमिका को मुख्य बताया है. साथ ही, उनके बच्चों के संभावित विदेशी नागरिकता संबंधी दस्तावेज भी जांच के दायरे में हैं. इस पूरे मामले में आगे और खुलासों की संभावना जताई जा रही है.