अजित पवार के बाद संकट में एनसीपी! क्या भाजपा का साथ बचा पाएगा पार्टी का वजूद?
अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं. नेतृत्व संकट, मराठा राजनीति और भाजपा के रुख ने महाराष्ट्र की सियासत को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है.
महाराष्ट्र की राजनीति एक बड़े झटके से गुजर रही है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के आकस्मिक निधन ने न केवल पार्टी को नेतृत्वहीन कर दिया है, बल्कि महायुति सरकार के संतुलन पर भी असर डाला है. सवाल यह है कि क्या अजित पवार के बिना एनसीपी अपना वजूद बनाए रख पाएगी और क्या भाजपा आगे भी उसे सत्ता में साझेदार बनाए रखेगी. इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे.
नेतृत्व संकट में एनसीपी
अजित पवार एनसीपी के लिए केवल एक नेता नहीं, बल्कि पार्टी की धुरी थे. उनके न रहने से पार्टी में नेतृत्व का स्पष्ट अभाव दिख रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एनसीपी में फिलहाल कोई ऐसा चेहरा नहीं है जो मराठा राजनीति में अजित पवार की जगह भर सके. यही कारण है कि पार्टी के भीतर असमंजस की स्थिति बनी हुई है और कार्यकर्ता भविष्य को लेकर चिंतित हैं.
मराठा राजनीति और शरद पवार का प्रभाव
मराठा मतदाता लंबे समय से अजित पवार के साथ जुड़े रहे हैं. अब उनके न रहने पर यह वर्ग एक बार फिर शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी की ओर झुक सकता है. शरद पवार भले ही फिलहाल किसी एकता की जल्दबाजी में न दिखें, लेकिन यह साफ है कि उनकी राजनीतिक पकड़ अब भी मजबूत है और वह भाजपा विरोधी राजनीति को आगे बढ़ाते रहेंगे.
भाजपा का रुख और महायुति की मजबूरी
अजित पवार के निधन के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भाजपा एनसीपी को सरकार में बनाए रखेगी. भाजपा नेताओं के संकेत साफ हैं कि महायुति में एनसीपी के हिस्से का उपमुख्यमंत्री पद बरकरार रहेगा. 2024 के विधानसभा चुनाव में महायुति को मिली भारी जीत के कारण भाजपा फिलहाल किसी बड़े राजनीतिक जोखिम से बचना चाहेगी.
पवार परिवार से नया नेतृत्व?
एनसीपी के भीतर यह चर्चा तेज है कि पार्टी की कमान अब पवार परिवार के किसी सदस्य को सौंपी जा सकती है. अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार या बेटे पार्थ पवार के नाम सामने आ रहे हैं. साथ ही प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और सुनील तटकरे जैसे वरिष्ठ नेता भी पार्टी को संभाले रखने में भूमिका निभा सकते हैं. हालांकि, यह फैसला आसान नहीं होगा.
आगे की राजनीति की तस्वीर
अजित पवार के बिना एनसीपी का रास्ता आसान नहीं है. सत्ता में रहते हुए पार्टी कुछ समय तक स्थिर रह सकती है, लेकिन चुनावी राजनीति में उसकी असली परीक्षा होगी. भाजपा के लिए भी यह समय संतुलन साधने का है, जबकि शरद पवार आने वाले राजनीतिक हालात देखकर ही अगला कदम तय करेंगे. महाराष्ट्र की राजनीति अब निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुकी है.