'देश के लिए सबसे बड़ी त्रासदी होगी...', NSA अजित डोभाल ने युवाओं को क्यों दी चेतावनी?
नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 3 दिवसीय विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने युवाओं को संबोधित किया.
नई दिल्ली: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में कहा कि भारत की आजादी कोई साधारण उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह अनगिनत बलिदानों और कष्टों के बाद मिली है. उन्होंने बताया कि देश की स्वतंत्रता के लिए कई पीढ़ियों ने अपमान, हिंसा, विनाश और असहनीय पीड़ा झेली. उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे इस इतिहास को केवल पढ़ें नहीं, बल्कि उससे प्रेरणा लें और देश के पुनर्निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं.
अजीत डोभाल ने क्या कहा?
यह विचार उन्होंने 'विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग' के उद्घाटन समारोह में साझा किए. अपने संबोधन में डोभाल ने कहा कि आज जो स्वतंत्र भारत हमें दिखाई देता है, वह हमेशा से ऐसा नहीं था. हमारे पूर्वजों ने इस आजादी के लिए अपने प्राण तक न्योछावर कर दिए. हमारी सांस्कृतिक धरोहर को नुकसान पहुंचाया गया और हमारे धार्मिक स्थलों को लूटा गया. उस समय देश के लोग खुद को असहाय महसूस करते थे और सब कुछ होते हुए देखते रह जाते थे.
'पीड़ा को एक शक्ति में बदलना जरूरी'
उन्होंने कहा कि यह इतिहास आज के युवाओं के सामने एक बड़ी चुनौती रखता है. हर युवा के भीतर देश के लिए कुछ कर गुजरने की आग होनी चाहिए. डोभाल ने स्पष्ट किया कि 'बदला' शब्द शायद सही न लगे, लेकिन इतिहास से मिली पीड़ा को एक शक्ति में बदलना जरूरी है. उनका कहना था कि हमें अपने अतीत से सीख लेकर भारत को फिर से उस ऊंचाई पर ले जाना है, जहां हम अपने मूल्यों, विचारों, अधिकारों और विश्वासों के आधार पर एक मजबूत और महान राष्ट्र का निर्माण कर सकें.
अजित डोभाल ने क्यों दी चेतावनी?
डोभाल ने भारत की प्राचीन सभ्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सभ्यता अत्यंत उन्नत और शांतिपूर्ण थी. उन्होंने बताया कि भारत ने कभी दूसरों के मंदिर नहीं तोड़े, न ही लूटपाट के लिए किसी देश पर हमला किया. जब दुनिया के कई हिस्से पिछड़े हुए थे, तब भी भारत ज्ञान, संस्कृति और शांति का केंद्र था. लेकिन उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अतीत में हमने अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई, जिसका हमें भारी नुकसान उठाना पड़ा.
'देश के लिए सबसे बड़ी त्रासदी होगी'
उन्होंने युवाओं से सवाल करते हुए कहा कि क्या हमने इतिहास से मिले उन सबकों को सच में सीखा है? और क्या हम उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचा पाएंगे? उनका कहना था कि अगर भविष्य की पीढ़ियां इन अनुभवों को भूल गई, तो यह देश के लिए सबसे बड़ी त्रासदी होगी.
कार्यक्रम में दो हजार से अधिक युवा शामिल
यह संबोधन विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग (VBYLD 2026) के उद्घाटन अवसर पर दिया गया. यह तीन दिवसीय कार्यक्रम 9 से 12 जनवरी तक भारत मंडपम में आयोजित हो रहा है. युवा मामले और खेल मंत्रालय द्वारा आयोजित इस पहल में देशभर से 2000 से अधिक युवा भाग ले रहे हैं. यहां युवा विभिन्न विषयों पर चर्चा, नवाचार और विचार-विमर्श कर रहे हैं. इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को विकसित भारत@2047 के सपने को साकार करने में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना है.
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