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राजीव गांधी हत्याकांड के दोषी ए.जी. पेरारिवलन बने वकील, जिस कोर्ट में मुजरिम बनकर हुए पेश अब उसी में लड़ेंगे न्याय की लड़ाई

राजीव गांधी हत्याकांड में मौत की सजा पाने वाले ए.जी. पेरारिवलन कई सालों की लंबी लड़ाई के बाद अब खुद न्यायपालिका का हिस्सा बन चुके हैं. दोषी, कैदी से वकील तक का सफर उन्होंने कैसे पूरा किया, इसे समझना बेहद जरूरी है.

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Shanu Sharma

कोई व्यक्ति अगर चाह ले तो शायद सबकुछ बदल सकता है, इसका एक उदाहरण सामने आ रहा है. एक समय पर राजीव गांधी हत्याकांड में मौत की सजा पाने वाले ए.जी. पेरारिवलन ने खुद एक मौका मिलने पर खुद की जिंदगी बदल ली. उन्होंने सोमवार को खुद को तमिलनाडु और पुडुचेरी बार काउंसिल में वकील के रूप में रजिस्ट्र किया. 

पेरारिवलन अब 54 साल के हो चुके हैं और अब वह मद्रास हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करेंगे. यह बात आश्चर्यजनक है, क्योंकि इससे पहले उन्होंने उसी न्यायिक व्यवस्था के अंदर 31 वर्ष से अधिक समय तक आरोपी, दोषी और अपीलकर्ता के रूप में लड़ाई लड़ी. अब उसी अदालत में पेरारिवलन काला कोट पहनकर अदालत आएंगे.

क्या है ए.जी. पेरारिवलन की पूरी कहानी?

पेरारिवलन का यह कदम न केवल उनकी मेहनत और सफलता को जाहिर कर रहा है, बल्कि जेल सुधार और कैदियों के अधिकारों की दिशा में भी एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है. जून 1991 में राजीव गांधी की श्रीपेरुम्बुदूर में हुई आत्मघाती हमले के कुछ हफ्तों बाद पेरारिवलन को गिरफ्तार किया गया था. साजिश के मामले में दोषी ठहराए गए सात लोगों में शामिल पेरारिवलन को शुरू में मौत की सजा सुनाई गई, जिसे बाद में उम्रकैद में बदल दिया गया.

लंबी कानूनी लड़ाई के दौरान उनके परिवार, खासकर मां अरपुथम अम्माल ने राजनीतिक नेताओं, मुख्यमंत्रियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से निरंतर गुहार लगाई. वे यह दलील देते रहे कि पेरारिवलन को गलत तरीके से फंसाया गया. जिसके बाद मई 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए पेरारिवलन की रिहाई का आदेश दिया. 

क्या है पेरारिवलन की अगली तैयारी?

अदालत ने उनकी लंबी कैद, जेल में अच्छा आचरण और मर्सी पिटीशन की लंबित स्थिति को ध्यान में रखा. रिहाई के बाद पेरारिवलन ने बेंगलुरु के डॉ. बी.आर. अंबेडकर लॉ कॉलेज में दाखिला लिया. उन्होंने 2025 में अपनी कानून की डिग्री पूरी की और उसी वर्ष ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन भी पास कर लिया. इसके बाद सोमवार को नामांकन समारोह के दौरान पेरारिवलन ने कहा कि उनके सालों के मुकदमेबाजी के अनुभव ने उन्हें कानून की पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया.

उन्होंने कहा कि अब मैं कोई बड़ा और मशहूर वकील नहीं बनना चाहता बल्कि जेलों में बंद उन हजारों कैदियों की आवाज बनने की है जिन्हें कोई कानूनी मदद नहीं मिल पाती. पेरारिवलन का बार काउंसिल में नामांकन कई मायनों में अनोखा है. वे उसी मद्रास हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करेंगे जहां उनके मामले की सुनवाई हुई थी.