PM मोदी के बचपन से प्रेरणा लेंगे छात्र, देश भर के स्कूलों को दिखाई जाएगी फिल्म, शिक्षा मंत्रालय का निर्देश
PM Modi: भारत के शिक्षा मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण पहल के तहत केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS), और नवोदय विद्यालय समिति (NVS) को निर्देश जारी किया है. इन निर्देशों के अनुसार, स्कूलों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बचपन से प्रेरित फिल्म "चलो जीते हैं" को 16 सितंबर से 2 अक्टूबर, 2025 तक प्रदर्शित किया जाएगा.
A film on PM Modi childhood will be shown in schools: आज भारत के प्रधानमंत्री मोदी का 75वां जन्मदिन है. इस अवसर पर शिक्षा मंत्रालय ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) और नवोदय विद्यालय समिति (NVS) को एक बड़ा निर्देश जारी किया है.
मंत्रालय ने कहा कि अपने स्कूलों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन से जुड़ी बचपन की घटनाओं से प्रेरित फिल्म "चलो जीते हैं" दिखाने का निर्देश दिया जाए. यह फिल्म 16 सितंबर से 2 अक्टूबर, 2025 तक दिखाई जाएगी, जो संयोग से 17 सितंबर को प्रधानमंत्री के जन्मदिन के साथ पड़ता है.
मूल्यों पर आधारित हो शिक्षा
‘प्रेरणा’ एक अनूठा कार्यक्रम है, जो गुजरात के वडनगर में 1888 में स्थापित ऐतिहासिक वर्नाक्युलर स्कूल से संचालित होता है, जहां से प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी. यह पहल नौ मानवीय मूल्यों पर आधारित है, जिनमें स्वाभिमान, शौर्य, परिश्रम, सत्यनिष्ठा, करुणा, नवाचार, विविधता, श्रद्धा, और स्वतंत्रता शामिल हैं. इस कार्यक्रम के तहत देश के 650 जिलों में 65 बैच सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं. प्रेरणा कहानी सुनाने, मूल्य-आधारित सत्रों, स्वदेशी खेलों, और ऑडियो-विज़ुअल शिक्षण के माध्यम से अनुभवात्मक शिक्षा को बढ़ावा देता है.
‘चलो जीते हैं’ कैसी है फिल्म
2018 में रिलीज हुई फिल्म "चलो जीते हैं" ने 66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में पारिवारिक मूल्यों पर आधारित सर्वश्रेष्ठ गैर-फीचर फिल्म का पुरस्कार जीता था. यह फिल्म स्वामी विवेकानंद के कथन, "केवल वे ही वास्तव में जीते हैं जो दूसरों के लिए जीते हैं," को जीवंत करती है. यह प्रधानमंत्री मोदी के बचपन की वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है और प्रेरणा के नौ मूल मूल्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती है. फिल्म का उद्देश्य युवा शिक्षार्थियों में चरित्र निर्माण, जिम्मेदारी, और नैतिक निर्णय लेने की भावना को प्रोत्साहित करना है.
स्कूलों में फिल्म प्रदर्शन का महत्व
शिक्षा मंत्रालय के 11 सितंबर के निर्देशों के अनुसार, स्कूलों को इस फिल्म को अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने का आदेश दिया गया है. यह फिल्म छात्रों को सहानुभूति, आत्म-चिंतन, आलोचनात्मक सोच, और प्रेरणा जैसे सामाजिक-भावनात्मक कौशलों को विकसित करने में मदद करेगी. यह नैतिक तर्क के लिए एक केस स्टडी के रूप में भी कार्य करती है, जो छात्रों को अमूर्त मूल्यों को व्यवहार में समझने का अवसर प्रदान करती है. प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने इसकी देशव्यापी पुनः रिलीज की पुष्टि की है.
प्रेरणा कार्यक्रम के पहले चक्र के समापन के बाद,अक्टूबर 2025 से ‘प्रेरणा उत्सव’ का दूसरा चरण शुरू होगा. स्कूलों को इस उत्सव में अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है. इस पहल से संबंधित अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट prerana.education.gov.in पर उपलब्ध है. यह पहल न केवल शिक्षा को मूल्य-आधारित बनाती है, बल्कि छात्रों को बेहतर नागरिक बनने के लिए प्रेरित भी करती है.
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